Osho World Online Hindi Magazine :: April 2012
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ओशो का ओशनिक साहित्य

ओशो: ध्यान और उत्सव के ओजस्वी ऋषि

इस नव-प्रकाशित पुस्तक के लेखक हैं स्वामी सत्य वेदांत (डॉ. वसंत जोशी)। यह पुस्तक हिंदी भाषा में प्रकाशित हुई है जिसे डायमंड पॉकेट बुक्स ने प्रकाशित किया है।

संबुद्ध रहस्यदर्शी की जीवन गाथा पर आधारित यह पुस्तक अंग्रेज़ी में 2 वर्ष पूर्व ( ओशो: दि लूमिनस रेबॅल के नाम से) प्रकाशित हो चुकी है। हिंदी में इसका अनुवाद स्वामी अंतर जगदीश ने किया है। हिंदी के पाठक अब इस संस्करण को पढ़ सकते हैं।

पुस्तक के लेखक स्वामी सत्य वेदांत, (पी.एच.डी. मिशिगन विश्वविद्यालय, एन आर्बर, यू.एस. एम.ए. पी.एच.डी. एम.एस. बड़ौदा विश्वविद्यालय, भारत), पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने विश्व भर में निरंतर यात्राएं करते हुए, व्याख्यान दिए हैं, शोधपत्र लिखे हैं, सेमिनार व सभाओं को संबोधित किया है।

पुस्तक के प्राक्कथन में स्वामीजी लिखते हैं: ‘‘ओशो कोई व्यक्ति नहीं, एक घटना हैं। उनके अस्तित्व को समेटना आसान नहीं और न ही उन्हें शब्दों में व्यक्त करना। ओशो सूर्य की भांति हैं--ज्योतिर्मय, सशक्त, जगमगाते और जीवन ऊर्जा बांटते हुए। जैसे हम सूर्य को नहीं बल्कि उसके प्रकाश में चमकती हुई वस्तुओं को देखते हैं, उसी तरह ओशो के प्रकाश में जीवन की वास्तविकता का दर्शन तो किया जा सकता है पर उसी भांति ओशो को उन्हीं आंखों से देखा नहीं जा सकता।’’

‘‘इस पुस्तक में मैंने ओशो के जीवन से संबंधित तथ्यों को आत्मसात किया है जो पहले, ‘द अवेकंड वन: लाइफ एंड वर्क ऑफ भगवान श्री रजनीश’ पुस्तक में आ चुके हैं। यह पुस्तक 1983 में हार्पर एंड रो, सेन फ्रांसिस्को द्वारा प्रकाशित की गई थी।

इस पुस्तक को लिखना एक अद्वितीय अनुभव का मेरी झोली में आना रहा है जिसने आनंद और आशीष दोनों से मुझे भर दिया। यह पुस्तक ओशो की आत्मकथा नहीं है। इसका आशय हर उस बिंदु और विवरण को सामने लाना नहीं है जो ओशो के विशाल सागर जैसे जीवन में निहित है बल्कि यह प्रयास ऐसा है जैसे हृदय के धागों से एक वस्त्र का ताना-बाना बुना जाए। मेरे मन से यह कभी नहीं निकला कि इस कथा को कलमबंद करना कितनी दुरुह चुनौती है...’’

यह पुस्तक सभी ओशो प्रेमियों और शिष्यों, गैर संन्यासियों व आध्यात्मिक रुझान के हर व्यक्ति के लिए और उनके लिए भी जो और अधिक जानना चाहते हैं, एक बहुमूल्य दस्तावेज है।

यह पुस्तक ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में बिक्री के लिए उपलब्ध है।