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| ओशो दर्शन |
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| ओशो कथा-सागर |
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जिंदगी को जिंदा जीना...
जिंदगी को अगर हमें जिंदा बनाना है, तो बहुत सी जिंदा समस्याएं खड़ी हो जाएंगी।
लेकिन होनी चाहिए। और अगर हमें जिंदगी को मुर्दा बनाना है, तो हो सकता है हम सारी समस्याओं को खत्म कर दें, लेकिन तब आदमी मरा-मरा जीता हैं
मैंने सुना है कि एक बगीचे में एक छोटा सा फूल—घास का फूल—दीवाल की ओट में ईटों में दबा हुआ जीता था। तूफान आते थे, उस पर चोट नहीं हो पाती थी, ईटों की आड़ थी। सूरज निकलता था... |
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| भारत एक सनातन यात्रा |
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जनसंख्या-विस्फोट
बुद्ध के जमाने में इस देश की आबादी दो करोड़ थी। लोग अगर खुशहाल थे तो कोई सतयुग के कारण नहीं। जमीन थी ज्यादा, लोग थे कम...
देश में लगातार बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय बनी हुई है। इसके आंकड़े दिन ब दिन छलांग लगाते ही जा रहे है। वर्तमान में पूरे विश्व की जनसंख्या 7 अरब के पार जा चुकी है। 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की जनसंख्या 1.22 करोड़ है... |
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| युवा-जगत |
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युवा पीढ़ी
वृद्ध पीढ़ी विरोध में है और जवान पीढ़ी अनुभवहीन है। रास्ता कौन बनायेगा? रास्ता बनाने के लिए दो चीजों की जरूरत है-अनुभव की और शक्ति की। शक्ति जवान के पास है, अनुभव बूढ़े के पास है
आंखों में उम्मीद के सपने, नयी उड़ान भरता हुआ मन, कुछ कर जाने का दमखम और दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने वाले साहस को...
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| ओशो-साहित्य |
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सहज जीवन
भाग एक और दो
ओशो की पुस्तकें सहज जीवन भाग एक और दो में मुख्यतः झेन प्रवचनों की झलक देखने को मिलती है। झ़ेन सदगुरु इक्यू के 'डोका' पर आधारित दोनों पुस्तके अंग्रेजी की प्रवचन माला 'टेक इट ईज़ी' खंड एक और दो का हिंदी अनुवाद है। जिसका श्रेय जाता है स्वामी ज्ञानभेद को जो लगातार ओशो की पुस्तकों का हिंदी अनुवाद करते आ रहे है।
सहज जीवन पुस्तक के प्रथम खंड में ओशो ने बोध और बुद्धत्व पर प्रकाश डाला है बोध के द्वारा ही बुद्धि और हृदय का चित्त चेतना को प्राप्त हो सकता है...
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| स्वास्थ्य |
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तनाव और विश्राम
हम शरीर में जो तनाव महसूस करते हैं, उसका मूल कारण है कुछ बनने की इच्छा। हर आदमी कुछ न कुछ बनने की चेष्टा कर रहा है। जो जैसा है, उसके साथ संतुष्ट नहीं है। हमारा होना स्वीकृति नहीं है, उसे इंकार किया जा सकता है और दूर कहीं एक लक्ष्य निर्मित... |
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| ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर |
सूफी वाज़द मेडीटेशन कैंप
1 से 5 अगस्त, 2012
संचालन - स्वामी आनंद कुल भूषण और स्वामी रविन्द्र भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340
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| गतिविधियां |
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ओशोधाम
गुरु पूर्णिमा महोत्सव
नई दिल्ली स्थित ओशोधाम में 28 जून से 3 जुलाई तक गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया गया...
ओशो वर्ल्ड गैलेरिया
गुरु पूर्णिमा उत्सव
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 27 जून की संध्या ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम हुआ...
ओशो किलिम
तुर्की देश की विशेष कलाकृति से बनी 'ओशो किलिम' कालीन की प्रदर्शनी का आयोजन 7 जुलाई को नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में किया गया...
सन्यास जगत
भीमताल, नैनीताल
ओशो ओम् प्रकाश पीठ द्वारा आयोजित अप्रैल से जुलाई, गुरु पूर्णिमा तक अनेकों ध्यान-शिविर, ध्यान-ग्रुप, उत्सव और महोत्सव आयोजित हुए। शिविरों में आए सभी मित्रों ने ध्यान की गंगोत्री में डुबकी...
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| समाचार पत्रों में ओशो |
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सब विधि सहजे पाइए
प्रेम, ध्यान और भक्ति के ओशो प्रवचन जून माह में राज्यों के अधिकांश हिंदी तथा अंग्रेजी समाचार पत्रों में पूरे महीने छाए रहे... |
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| टैरो |
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अगस्त 2012
-मा दिव्यम नदीशा
''संन्यास के पक्षी के दो पंख हैं—प्रेम और ध्यान। जहां संन्यास है, वहां प्रेम है, वहां ध्यान है। ध्यान का अर्थ होता हैः अकेले में आनंदित होने की क्षमता; एकांत में भी रसमग्न होने की पात्रता। और प्रेम का अर्थ होता हैः संग-साथ में आनंदित होने की क्षमता। ध्यान तो है, जैसे कोई बांसुरी अकेली बजाए; और प्रेम है आर्केस्ट्रा—बांसुरी भी हो; तबला भी ताल दे; सितार भी बजे; और—और साज हों।'' -ओशो
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| हास्य-ध्यान |
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धनीराम बाजार में घूम रहे थे। साली उनके साथ थी। तभी एक फटेहाल भिखारी ने कहा-''बाबूजी भूख लगी है भगवान के नाम पर कुछ दे दो।''
धनीराम ने भिखारी से पूछा-''तुम जुआ खेलते हो? शराब पीते हो?''
''जी नहीं।'' भिखारी ने सटपटाकर जवाब दिया।
''तो फिर तुम लड़कियों से दोस्ती करते होंगे?''
'' जी नहीं।''...
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