Osho World Online Hindi Magazine :: August 2012
www.oshoworld.com
 
हास्य-ध्यान

"जब तुम वास्तव में हंसते हो, तो अचानक मन विलीन हो जाता है। जहां तक मैं जानता हूं, नाचना और हंसना सर्वोत्तम, स्वाभाविक व सुगम द्वार हैं"

ओशो

  • धनीराम बाजार में घूम रहे थे। साली उनके साथ थी। तभी एक फटेहाल भिखारी ने कहा-''बाबूजी भूख लगी है भगवान के नाम पर कुछ दे दो।''
    धनीराम ने भिखारी से पूछा-''तुम जुआ खेलते हो? शराब पीते हो?''
    ''जी नहीं।'' भिखारी ने सटपटाकर जवाब दिया।
    ''तो फिर तुम लड़कियों से दोस्ती करते होंगे?''
    '' जी नहीं।''
    धनीराम ने साली की ओर देखा, हंसकर कहा-''देखो रूबी, जो लोग ये काम नहीं करते, उनकी क्या हालत होती है?''

  • एक मित्र ने कहा-''अनिलजी, मैं विवाह इस वजह से नहीं करना चाहता कि मुझे स्त्रियों से डर लगता है।''
    अनिलजी ने समझाया-''ऐसी बात है तो तुरंत विवाह कर डालो। मैं तुम्हें अपने अनुभव से कहता हूं कि विवाह के बाद एक ही स्त्री का डर रह जाता है।''

  • एक महिला ने अपनी सहेली को बताया—''हम अपनी लड़की के विवाह में धोखा खा गए।''
    सहेली ने कारण पूछा तो वह बोली-''विवाह से पूर्व उन लोगों ने लड़के की मासिक आय चार अंकों में बताई थी।''
    ''तो क्या ऐसा नहीं है? सहेली ने पूछा।
    ''तनख्वाह चार अंकों वाली तो है, पर उसे 9,999 पैसे मिलते हैं।'' महिला ने साफ कहा।

  • पूछताछ की खिड़की पर बैठी एक खूबसूरत नवयुवती के पास एक नौजवान जाकर खड़ा हो गया।
    नवयुवती ने मधुर मुस्कान के साथ पूछा-''यस प्लीज, क्या पूछना चाहते हैं?''
    नवयुवक ने कहा-''आपके घर का पता।''

  • जवान पत्नी-''ऊपर देखिए, चौदहवीं का चांद हंसकर हम पर किरणें बिखेर रहा है।''
    बूढ़ा पति चश्मा साफ कर दुबारा लगाते हुए बोला—''मुझे तो पूर्णमासी का चांद लगता है।''

  • ' क्यों साहब, आप बीस मिनट से फोन पकड़े खड़े हैं, एक शब्द भी आपके मुंह से नहीं निकला। जरा रिसीवर छोड़ दें, मैं जल्दी में हूं।''
    ''जनाब, देख नहीं रहे हैं, मैं अपनी पत्नी से बात कर रहा हूं।''