Osho World Online Hindi Magazine :: August 2012
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समाचार पत्रों में ओशो
सब विधि सहजे पाइए



प्रेम, ध्यान और भक्ति के ओशो प्रवचन जून माह में राज्यों के अधिकांश हिंदी तथा अंग्रेजी समाचार पत्रों में पूरे महीने छाए रहे।

'किसी दूसरे के जैसा बनने की कोशिश में आदमी बहुत गहरे बंधन में पड़ता है। और बंधन में इसलिए पड़ता है कि दूसरे जैसा कभी बन नहीं सकता। इसलिए कि यह असंभावना है, यह इंपोसिबिलिटी है। लेकिन एक कोशिश में अभिनय कर सकता है दूसरे जैसा। उसकी आत्मा अलग हो जाती है, अभिनय अलग हो जाता है।'' 1 जून को हैदराबाद से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'डेली हिन्दी मिलाप' ने ओशो वाणी स्तम्भ में ''किसी का अंधानुकरण मत करिये'' नामक शीर्षक से ओशो प्रवचन को अपने कालम में प्रकाशित किया।

नई दिल्ली से राष्ट्रीय सहारा ने 2 जून को 'ध्यान, प्रेम और अंतर्यात्रा के उपाय' नाम के ओशो लेख को छापा। जिसमें ओशो ने कहा, ''गुरु से संबंध तुम्हें अनुशासन देगा, एक जीवन शैली देगा। ध्यान देगा, प्रेम देगा, अंतर्यात्रा के उपाय देगा।'' इसी क्रम में 3 जून को ''सब विधि सहजे पाइए, जो मन होगी होई'' यह ओशो प्रवचनांश 'आज समाज' अख़बार में आया।

एक बुद्ध पुरुष का विद्रोही बचपन की कड़ी पुणे से प्रकाशित 'आज का आनंद' समाचार पत्र में प्रमुखता से छपी, उसका शीर्षक रहा 'परमात्मा पहले सर्जन था!' जो सदगुरु ओशो के संबुद्ध होने की कहानी बयां करता है। 5 जून को नई दिल्ली से हिन्दुस्तान अखबार ने 'भक्त और भी हुए, पर मीरा भक्ति का एवरेस्ट है' और 'नया इंडिया' ने 'क्रांति और आनंद' शीर्षक ओशो प्रवचनों को अपने अखबार के माध्यम से ओशो संन्यासियों और प्रेमियों तक पहुंचाया।

10 जून को अंग्रेजी समाचार पत्र 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' ने चैनेलाइज़ योर एंगर और 11 जून को लखनऊ से प्रकाशित 'स्पष्ट आवाज़' ने ओशो की सक्रिय ध्यान विधि को छापा। 'आध्यात्मिक गुरु ओशो की नजर में प्रेम हमारी जड़ है, हमारे भीतर की श्वास है।' प्रेम पर आधारित ओशो का यह प्रवचन आया 12 जून को 'हिन्दुस्तान' में। इलाहाबाद से 'यूनाईटेड भारत' ने 'ज्ञान से होती है सच्ची भक्ति का' ओशो अमृत प्रवचन 14 जून को निकाला।

माह के आखिरी सप्ताह में हैदराबाद से प्रकाशित अखबार 'स्वतंन्त्र वार्ता' ने 'सदेंह करने का साहस तो करके देखिए' प्रवचन को अपने कॉलम में जगह दी। 'गुरु देता है संबल' यह ओशो विचार चण्डीगढ़ से प्रकाशित प्रमुख हिन्दी समाचार पत्र दैनिक जागरण में छपा। वही इसी तारीख में 'पुणे मिरर' अख़बार ने 'वननेस इन साउण्ड' नाम से लेख प्रकाशित किया।

29 जून को इन्दौर का समाचार पत्र दैनिक दबंग दुनिया ने ओशो प्रवचन को अपने अंक में छापा। 30 जून को दिव्य हिमाचल अख़बार में 'चेतना की खोज' शीर्षक के साथ ओशो प्रवचनांश आया। जिसमें ओशो कहते है ''गुरु शिक्षक नहीं है। वह ज्ञान नहीं देता, उससे तुम्हारी जानकारी भी नहीं बढ़ेगी। ठीक उल्टा है शिक्षक गुरु से। वह तुम्हारा सारा ज्ञान छीन लेता है। वह तुम्हारी स्मृति को गिरा देने के उपाय बताता है। वह पहले तुम्हें परम् आज्ञानी बना देता है, क्योंकि जैसे ही तुम परम अज्ञान की प्रतीत से भर जाओ, वैसे ही परमात्मा के द्वार खुल जाते है।''

इस प्रकार से पूरे जून माह में ओशो के अमृत प्रवचनों की माला और लेख देश के विभिन्न राज्यों और शहरो के समाचार पत्रों में देखने को मिले।