Osho World Online Magazine :: December 2011
www.oshoworld.com
 
हंसता हुआ धर्म

चुटकुले का उद्देश्य चुटकुला ही नहीं है। इससे पैदा होने वाला हास्य है क्योंकि हास्य के उन क्षणों में तुम्हारे विचार रुक जाते हैं। उस हंसी में, मन नहीं रह जाता और हंसी के बाद एक छोटा सा अन्तराल...और मेरी बात तुम्हारे गहनतम केन्द्र तक प्रवेश कर जाती है।

-ओशो

  • एक दिन ढब्बूजी केक खरीदने के लिए बाजार गए। मुश्किल से उन्होंने एक केक पसंद किया। बेकरी का कर्मचारी बोला, ‘हां तो ढब्बूजी, आप केक कटा हुआ चाहेंगे या पूरा?’ ‘कटा हुआ। ढब्बूजी ने कहा। ‘कितने टुकड़े करूं, चार या आठ?’ ‘चार ही करो जी, आठ टुकड़े खाना जरा मुश्किल होता है!!’

  • एक अध्यापक ने गीता के द्वंद्व शब्द की व्याख्या समझाते हुए कहा—द्वंद्व, ऐसे जोड़े को कहते हैं, जिसमें हमेशा विरोध रहता है। जैसे सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, और धूप-छांव आदि-आदि। अब तुममें से क्या कोई छात्र इसका उदाहरण दे सकता है? एक छात्र ने तपाक से बोला—जैसे पति-पत्नी।

  • मुन्ना स्कूल जा रहा था। ढब्बूजी ने देखा, उसने बस्ता भी उठा रखा है और सीढ़ी भी। उन्हें बड़ी हैरानी हुई। मुन्ने से पूछने लगे, ‘यह सीढ़ी लेकर किधर जा रहे हो, साहब?’ ‘पापाजी, मास्टरजी ने कहा है कि मैं इम्तिहान में पास हो गया हूं और आज से ऊपर की क्लास में बैठूंगा।’ मुन्ने ने जवाब दिया।

  • ढब्बूजी रसोई में बैठे थे। चूल्हे पर रखा दूध उबल-उबलकर बरतन से बाहर उफन रहा था। श्रीमती ढब्बूजी गुस्से में फनफनाती हुई रसोई में दाखिल हुईं और बोलीं, ‘क्या मैंने आपसे यह नहीं कहा था कि दूध उबलने के समय का खयाल रखना?’ ‘हां, कहा था! दूध ठीक बारह बजकर बारह मिनट पर उबला है।’ ढब्बूजी ने कलाई पर बंधी घड़ी दिखाते हुए कहा।

  • पति—अरे, सुनती हो, डॉक्टर का कहना है कि अधिक बोलने से उम्र काफी कम हो जाती है। पत्नी ने मुस्कुराकर कहा—अब तो तुमको विश्वास हो गया न कि मेरी उम्र पैंतालीस से घटकर पच्चीस कैसे हो गयी।

  • राह चलते एक व्यक्ति की पीठ पर जोर से धौल जमाते हुए ढब्बूजी बोले, ‘अरे चंदूलाल! कैसे हो?’ ‘उफ्! मैं...मैं...मैं...चंदूलाल नहीं हूं।’ वह व्यक्ति कराहकर पलटा और आंखें फाड़-फाड़कर देखते हुआ बोला, ‘अगर होता भी तो इतने जोर से कोई मारता है!’ ‘मैं चंदूलाल को कितने भी जोर से मारूं, तुमसे मतलब!’ ढब्बूजी बोले।

  • दो मंत्री हेलीकाप्टर में बैठे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा कर रहे थे। पहला मंत्री बोला—यदि मैं यहां पचास रुपए का नोट फेंक दूं तो लोग कितने खुश होंगे? दूसरा मंत्री बोला—यदि मैं यहां सौ रुपए का नोट फेंक दूं तो लोग और भी खुश हो जाएंगे। उन दोनों की बेतुकी बातें सुनकर पायलट चुप न रह सका। वह झल्लाकर बोला—यदि मैं आप दोनों को उठाकर नीचे फेंक दूं तो लोग सबसे ज्यादा खुश होंगे।

  • एक बजाज की दुकान में आग लग गई। ढब्बूजी उसके मालिक से सांत्वना प्रकट करने गए। बोले, ‘आपकी साडि़यों की दुकान जल जाने से आपको काफी नुकसान हुआ होगा।’ ‘जी नहीं, सिर्फ आधा ही नुकसान हुआ।’ दुकानदार ने कहा। ‘वह कैसे?’ ‘सेल के कारण साडि़यों पर पचास प्रतिशत की छूट मिल रही थी।’

  • रात हो चुकी थी। श्रीमती ढब्बूजी बेलन लिये द्वार पर ही बैठी थीं। ढब्बूजी आए तो दहाड़कर बोलीं, ‘आज फिर देर से लौटे! कहां गए थे, महाशय?’ ‘देखो,’ ढब्बूजी ने संयत स्वर में कहा, ‘एक समझदार पत्नी अपने पति से कभी भी ऐसा सवाल नहीं करती।’ ‘और एक समझदार पति?’ श्रीमतीजी ने गुस्से में पूछा। ‘अब छोड़ो भी।’ ढब्बूजी बोले, ‘समझदार पति की तो पत्नी ही नहीं होती।’

  • मुल्ला नसरुद्दीन अपने डॉक्टर के पास आया और बोला: डॉक्टर, मेरी पत्नी तीन दिन से बिल्कुल चुप बैठी है, कुछ बोल नहीं रही। डॉक्टर बोला: मियां, आप मेरे पास क्यों आए। गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड वालों के पास जाओ।