Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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  हास्य ध्यान
 
 

"हास्य की क्षमता स्वयं की ओर इंगित होनी चाहिए-स्वयं पर हंसना बहुत बड़ी बात है और जो स्वयं पर हंस सकता है वह धीरे-धीरे दूसरों के प्रति करुणा और उत्तरदायित्व से भर जाता है। पूरी दुनिया में कोई घटना, कोई विषय हास्य को इस भांति से नहीं लेता है।"

ओशो
व्यंगम् शरणम् गच्छामि

1. रोहन-तुमने मुझे धोखा दिया है।
दुकानदार-नहीं साहब मैंने आपको अच्छी क्वालिटी का रेडियो दिया है।
रोहन-इसपे लिखा है मेड इन जापान लेकिन चालू करो तो बोलता है ऑल इंडिया रेडियो।

2. मोहन की मां की तबियत खराब हो गई। वह अपनी मां को लेकर अस्पताल गया।
डॉक्टर ने कहा, "इनके कुछ टेस्ट होंगे।"
मोहन-हे भगवान, अब क्या होगा "मेरी मां तो अनपढ है।"

3. पति-क्यों न आज की चाय बाहर चलकर पी जाए।
पत्नी-क्यों? तुम्हें क्या लगता है कि मैं चाय बनाते-बनाते थक गई हूं?
पति-अरे नहीं, दरअसल मैं ही कप प्लेट धोते-धोते तंग आ गया हूं।

4. पत्नी (पति से)-मेरे पिताजी जब गाते थे तो उड़ते हुए पंछी गिर जाया करते थे।
पति (पत्नी से)-क्या तुम्हारे पिताजी मुंह में कारतूस भर कर गाते थे।

5. पत्नी (पति से)-इतनी देर हो गई, आखिर क्या ढूंढ रहे हो?
पति (पत्नी से)-कुछ भी नहीं।
पत्नी (पति से)-कुछ तो जरूर खोया है! चार घंटे से मैरिज सर्टिफिकेट को उलट-पलट रहे हो।
पति (पत्नी से)-देख रहा हूं कि इसकी एक्सपायरी डेट कहां है?

6. पप्पू-अपनी शादी वाले दिन बहुत उदास था!
राकेश-क्या बात है? आप उदास क्यों हो?
पप्पू-मेरे ससुराल वालों ने बारात में कम लोगो को लाने के लिये कहा है! पता नहीं मुझे लेकर जाएँगे भी या नहीं।

7. सुरेश-बारिश बहुत तेज है, तूफान भी चल रहा है! आप घर जाने का विचार छोड़ दीजिए यहीं सो जाइए!
राजेश-आप कहते हो तो मैं यहीं सो जाता हूँ पर मैं घर से अपना नाइट सूट तो ले आऊं।

8. चुन्नू-धरती और चाँद का क्या रिश्ता है?
मुन्नू-बहन और भाई का!
चुन्नू-वो कैसे?
मुन्नू-हम धरती को धरती माता कहते हैं और चाँद को चंदा मामा।