Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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  ओशो-साहित्य परिचय
 
 

एक नई मनुष्यता का जन्म

विद्रोह, क्रांति और नई मनुष्यता का बीज बोने वाली यह ओशो पुस्तक सत्य, धर्म और स्वतंत्रता का बोध कराती है। भीड़ से निकलकर ही एक नया मनुष्य पैदा हो सकता है। क्योंकि भीड़ जकड़ने और बांधने का ही काम करती है और बंधन में बंधा व्यक्ति कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता। भले ही वह जंजीरें सोने की क्यों न हो, उनका अहसास दासता का ही प्रतीक होगा।

ओशो कहते हैं-''नये विद्रोही के लिए, सत्य ही केवल उसका धर्म है। सत्य के लिए वह अपना बलिदान देने को भी तैयार है और सत्य के लिए वह निंदा सहने को तैयार है और सत्य के लिए वह सूली पर भी चढ़ जाने को इच्छुक है।

नया विद्रोही वैयक्तिक है। वह भीड़ की जंजीरों से पूरी तरह आजाद है-भले ही वे जंजीरें सोने की ही क्यों न हों। वह एक उड़ते हुए पक्षी की भांति स्वतंत्र है। वह कोई भी पिंजरा चाहे वह कितना भी कीमती क्यों न हो, स्वीकार करेगा ही नहीं। सत्य उसका धर्म है, स्वतंत्रता उसका मार्ग है और अपने में पूरी तरह होना ही उसका लक्ष्य है।''

मानव को मानवता का बोध कराने वाली यह पुस्तक 19 प्रवचनों का अथाह सागर समेटे हुए है। जिसकी एक-एक बूंद का रसपान आतंरिक जागरूकता में शीतलता प्रदान करती है।

दिव्यांश पब्लिकेशन समूह से प्रकाशित इस साहित्य का अनुवाद स्वामी ज्ञान भेद ने किया है। किताब में कुल 304 पृष्ठ एवं मूल्य 375 रूपये है। इसके अलावा यह पुस्तक आकर्षक सजिल्द कवर पेज में उपलब्ध है।

ध्यान का दीया

प्रस्तुत ए.सी.डी. में 'प्रीतम छवि नैनन बसी' पुस्तक के प्रवचन नं. 9 का अपूर्व ऑडियो सकंलन है।

प्रवचन के पहले प्रश्न में ओशो कहते है-मन जीता है द्वंद्व में। फिर द्वंद्व चाहे प्रेम का हो या घृणा का, श्रद्धा का या अश्रद्धा का, शत्रुता का या मित्रता का-द्वंद्व द्वंद्व है। नास्तिक भी द्वंद्व में होता है और आस्तिक भी। क्योंकि नास्तिक आधा स्वीकार करता है-नकार। और आस्तिक भी आधा स्वीकार करता है-स्वीकार। हां और नहीं-यह भी द्वंद्व है। इस द्वंद्व में से तुमने एक को चुना तो दूसरे से तुम बच न सकोगे।

द्वंद्व का यह मौलिक सिद्धांत हैः एक को चुनो कि दूसरा भी चुन लिया गया-अनिवार्यरूपेण। यदि तुम प्रेम करोगे तो घृणा भी करोगे; घृणा से नहीं बच सकते। प्रकाश होगा तो अंधेरा भी होगा। फूल होंगे तो कांटे भी होंगे। अगर एक को चुना तो दूसरा पीछे से आ ही जाएगा।

ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन से निर्मित हिन्दी ओशो प्रवचनांश की ए.सी.डी. का मूल्य 150 रुपये है।

अहंकार और लोभ

''मृत्यु को जो सोचने लगता, विचारने लगता, उसके जीवन में क्रांति घटित होती है। धर्म असंभव था अगर मृत्यु न होती। पशुओं के पास कोई धर्म नहीं है, क्योंकि उन्हें मृत्यु का बोध नहीं है। पशु सोच नहीं पाता कि मरेगा; उतना विचार नहीं, उतना विवेक नहीं। जो मनुष्य भी बिना मृत्यु को सोचे-विचारे जीते हैं, पशु जैसे जीते है, फिर उनमें और पशु में बहुत भेद नहीं। क्या भेद होगा? एक ही भेद है मनुष्य और पशु में कि पशु मूल्य की धारणा नहीं कर पाता, मनुष्य कर पाता है। जो मनुष्य इस धारणा को नहीं करता, इसको दबाता है, इससे आंख चुराता है, उसने मनुष्य होने से बचने की ठान रखी है। वह कभी मनुष्य न हो पाएगा। और जो मनुष्य ही न हो पाए, उसके परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग अवरूद्ध हो गया।''

विचारों की क्रांति को समेटे हुए इस ए.सी.डी. में ''कहे वाजिद पुकार'' पुस्तक के प्रवचन नं. 7 का ओशो ऑडियो प्रवचानांश संकलित है।

ओशो वर्ल्ड फांउडेशन की ओर से निर्मित उक्त ऑडियो प्रवचन का मूल्य 150 रुपये मात्र है।

चार आर्य सत्य

प्रस्तुत ए.सी.डी. बुद्ध की देशनाओं की पुस्तक श्रृखंला 'एस धम्मों सनंतनो' से संकलित प्रवचनों को समाए हुए है।

मनुष्य दुखी क्यों है यही बुद्ध का मौलिक प्रश्न है। परमात्मा है या नहीं, संसार है या नहीं, आत्मा मरने के बाद बचती है या नहीं। निर्गुण है परमात्मा या सगुण। इस तरह की बातों को उन्होंने व्यर्थ कहा है। और इस तरह के प्रश्नों को आदमी की चालाकी कहा है। ये जीवन के असली सवालों से बचने के उपाय है। ये कोई सवाल नहीं है?

ओशो हिन्दी प्रवचन की इस ए.सी.डी. का मूल्य 150 रुपये एवं इसका निर्माण ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन ने किया है।

प्रस्तुत हिन्दी साहित्य ओशो सन्यासियों एवं प्रेमियों के लिए बिक्री हेतु नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, ओशोधाम, और ओशो राजयोग ध्यान केन्द्र के अतिरिक्त हमारी ऑनलाइन वेबसाइट www.oshoworld.com पर भी उपलब्ध है।