Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
www.oshoworld.com
 
  विशेष
 
 

ओशो का भोजन

-मा अमृत मुक्ति

भोजन के बारे में सद्गुरु ओशो की एक विशेष बात थी कि जो चीज उनको पंसद आती थी उसको खा लेते थे। और पसंद न आने पर दोबारा नहीं बनाने की सलाह देते है...

भगवान रजनीश को भोजन में मटर और गोभी की सब्जी खाना काफी पसंद था। इसके अलावा सूप और दाल भी उनकी पसंदीदा हुआ करती थी। ओशो की मनपंसद होने के कारण इन सब्जियों को हमने अच्छी तरीके से बनाना भी अच्छी तरीके से वुडलेंड में सीख लिया था। इसके अलावा खाने में चटनी और खाखरा भी उनकी मेन्यू में शामिल था। भोजन की सब्जियां बारी-बारी से प्रयोग में लायी जाती थी। किस सब्जी को कब और कैसे बनाना है, इसका निर्णय मैं और दिव्या किया करते थे। भोजन के बारे में सद्गुरु ओशो की एक विशेष बात थी कि जो चीज उनको पंसद आती थी उसको खा लेते थे और पसंद न आने पर दोबारा नहीं बनाने की सलाह दे देते थे। जिसे देखकर साफ झलकता था कि उनके मन में शिकायत का भाव बिल्कुल भी पैठ नहीं बना सकता। गुरु मीठा खाना भी अच्छा लगता था। जिसमें उन्हें मलाई के लड्डू और रसगुल्ले खाना खूब रास आता था। अमेरिका के रजनीशपुरम आश्रम से लौटने के बाद उनकी रूचि चटपटा खाने की तरफ हो गयी। हालांकि पूना में साधारण ही भोजन ही किया। धीरे-धीरे ओशो कम्यून में ब्रेड, कचैड़ी और पाव-भाजी भी खाना पंसद करने लगे।

विदेशी व्यंजनों में इटैलियन में वे सफेद सॉस वाली या उबली हुई खाने की चीजें पंसद करते थे। गुरु प्रातः 6 और 7 बजे ब्लैक और दूध की चाय पीते थे। चाय के साथ सेव का सेवन करते थे। खाना सुबह 8 बजे के प्रवचन के बाद ही खाते थे। पूना प्रथम में वे खाखरा खाते थे बाद में पूना-द्वितीय में रोटी-सब्जी करते थे। रात्रि में कुछ मीठा खाकर 11 बजे सो जाते थे। रजनीशपुरम में प्रातः 6 बजे चाय और नहाने के बाद जूस पीते थे। उनके दोपहर के भोजन में पीने के लिए जूस अवश्य होता था। पूना और रजनीशपुरम की बात की जाए तो संबुंद्ध गुरु ओशो अमेरिका में जूस का सेवन ज्यादा ही करते थे।