एक राजधानी में एक भिखारी एक सड़क के किनारे बैठकर बीस-पच्चीस वर्षों तक भीख मांगता रहा। फिर मौत आ गयी, फिर मर गया। जीवन भर यही कामना की कि मैं भी सम्राट हो जाऊं। कौन भिखारी ऐसा है, जो सम्राट होने की कामना नहीं करता? जीवन भर हाथ फैलाये खड़ा रहा...
पहली बार मुझे सद्गुरु ओशो के बारे में 1976 में एक अखबार के जरिये पता चला तब उन्हें भगवान रजनीश से संबोधित किया जाता था। उन दिनों में कुछ लोगों के मुख से भी अनेक बार उनके बारे में सुना पर सरकारी नौकरी की व्यस्तता और कुछ शारीरिक परेशानियों की वजह से मैं उस समय पूना नहीं जा सका, लेकिन सौभाग्यवश 1993 में मा योग नीलम से बात हुई। तो उन्होंने ध्यान के बारे में बताया...
मैं तुम्हें नागार्जुन के जीवन से एक प्रसंग बताता हूं। भारत ने जो महान गुरु पैदा किए हैं, नागर्जुन उनमें से एक थे। वे बुद्ध, महावीर और कृष्ण की क्षमता रखते थे। और नागार्जुन एक दुर्लभ प्रतिभा थी। सच तो यह है कि बौद्धिक तल पर सारी दुनिया में वे अतुलनीय हैं...
हंसना कुछ ऊर्जा तुम्हारे अंतर्केंद्र से परिधि पर ले आती है। ऊर्जा हंसने के पीछे छाया की भांति बहने लगती है। तुमने कभी इस पर ध्यान दिया? जब तुम वास्तव में हंसते हो, तो उन थोड़े से क्षणों के लिए तुम एक गहन ध्यानपूर्ण अवस्था में होते...
ऐसा कोई भी भोजन जो उत्तेजक है, मनुष्य की चेतना को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है। ऐसा कोई भी भोजन जो मनुष्य को किसी भी तरफ की मूर्छा में, उत्तेजना में, किसी भी तरह की तीव्रता में...
9 दिसम्बर को नव-निर्मित ओशो कम्यून का उद्घाटन नेपाल के राष्ट्रपति डॉ. रामवरण यादव ने किया। इस अवसर पर ओशो प्रेमियों के साथ-साथ विभिन्न विद्या के अनेक गणमान्य व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर स्वामी आनंद अरुण ने महामहिम के साथ ओशो वर्ल्ड पत्रिका का लोकार्पण भी करवाया...
मरीज मुस्कुराता हुआ आया तो डाक्टर साहब बोले: वाह, लगता है मेरा इलाज काम कर गया।
मरीज: जी हां, आपने दवा की जो शीशी दी थी, उस पर लिखे डायरेक्शन पर अमल करने से कमाल हो गया।
डाक्टर: क्या लिखा था उस पर?
मरीज: यही कि शीशी का ढक्कन कसकर बंद रखें।