Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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  बाल जगत
 
 

पेंटिग का इतिहास

"जापान में कहा जाता है कि यदि तुम किसी बांस का चित्र बनाना चाहते हो तो पहले तुम्हें वह बांस बनना होगा अन्यथा तुम इसका चित्र कैसे बना सकते हो? तुम्हें उसके भीतर का कुछ अनुभव नहीं है और चित्रकारी और फोटोग्राफी में यही अंतर है। फोटोग्राफी तो जानकारी मात्र है क्योंकि कैमरा भीतर नहीं ले जा सकता। यह बाहर ही रहता है। यह दर्शक रहता है। यह उसका अंश नहीं बन सकता। चित्रकारी का अर्थ है कि चित्रकार उसके भीतर गया उसके अतिरिक्त अस्तित्व का हिस्सा बना, उसके साथ एक अनुभव किया।"

ओशो
शिक्षा ओशो की दृष्टि में

पेंटिंग अभ्यास है रंगों की चित्रकारी का, जिसके माध्यम से किसी सतह या पेपर पर चित्र तैयार किया जाता है। वैसे तो ज्यादातर इसे ब्रश के माध्यम से ही बनाया जाता है। पर इसे बनाने के लिए एयर ब्रश स्पंज चाकू आदि का भी प्रयोग कर सकते हैं। पेंटिंग एक ऐसी कला है जो कि कार्य और उसकी प्रक्रिया दोनों का वर्णन करती हैं। जैसा कि अब अपने कार्य में समान कला के रूप में पेंटिंग का उपयोग अब कारीगर और बिल्डर भी करने लगे हैं। पेंटिंग्स बनाने के लिए कई तरह के माध्यम का प्रयोग किया जाता है, जैसे-दीवार, पेपर, कैनवास, ग्लास, रोगन, क्ले, पत्ते, कॉपर और कंक्रीट के अलावा भी इन्हें कई तरह के पदार्थ से बनाया जाता है, जैसे-बालू, क्ले, पेपर, सोने की पत्ती आदि।

पेंटिंग कलात्मकता से जुडी है, जिसके कई तरह के प्रकार होते हैं-रेखाचित्र, आकृति, कल्पना और भावनाओं को इस माध्यम से व्यक्त करने के लिए दूसरे और भी कई माध्यम हो सकते हैं। पर ये सब निर्भर करता है कलाकार पर, कि वो क्या बनाना चाहता है। पेंटिंग्स कई तरह की हो सकती है, जैसे-प्राकृतिक या फिर असल जिन्दगी से जुड़ी किसी की कलाकृति, फोटोग्राफी से सम्बन्धित, काल्पनिक, किसी कहानी के रूप में, प्रतीकात्मक, भावनात्मक या फिर राजनीतिक।

फ्रांस की ग्रोट्टे चाऊवेट दुनिया की सबसे पुरानी पेंटिंग है, जिस पर कुछ पुरातत्वविदों का कहना है कि ये 32000 साल पुरानी है। जिसे बनाने के लिए गेरुए रंग और काले रंग का प्रयोग किया गया है और उसमें घोड़े, गेंडा, शेर, भैंस, विशालकाय, हाथी, काल्पनिक चित्र और मानव चित्र को प्रदर्शित किया गया है। पेंटिंग्स कहां से शुरू हुई इसके सबसे पुराने सबूत अरहम लैंड की पहाड़ियों में मिलते हैं, जोकि उत्तरी आस्ट्रेलिया में है। इन पेंटिंग्स में जो सामान उपयोग किया गया है वो 60000 साल पुराने हैं। पुरातत्वविदों को उत्तरी-पश्चिमी आस्ट्रेलिया की पहाड़ियों में रॉक पेंटिंग का एक अंश मिला है, जोकि 40000 साल पुराना है। इसी तरह की कैव पेंटिंग्स पूरी दुनिया में अब तक मौजूद हैं-इंडिया, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, चाइना, आस्ट्रेलिया, प्रमुख हैं।

पश्चिमी सभ्यता में आयल पेंटिंग और वाटर कलर पेंटिंग बहुत पुराना और सटीक तरीका है। जबकि पूर्वी सभ्यता इस कला को प्रदर्शित करने की स्याही और रंग बहुत पुराना और ऐतिहासिक तरीका रहा है। पेंटिंग्स वैसे तो दो तरह की होती हैं लैंडस्केप और पोट्रेट, लेकिन इन्हें बनाने के कई प्रकार होते हैं जोकि अपनी एक अलग खासियत रखते हैं और अनूठापन लिए हुए हैं।

वो इस प्रकार हैं-ऑयल, पेंटिंग, पेस्टल, वाटरकलर, इंक, हॉट वैक्स, स्प्रे, फ्रेस्को, टेम्पेरा आदि।