Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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  ओशो-साहित्य
 
 

 

जीवन संगीत

इस पुस्तक में ओशो के ध्यान साधना पर दिये गये प्रवचनो का अद्वितीय संगम है। जिसमें ओशो कहते हैं-‘‘जो वीणा से संगीत के पैदा होने का नियम है, वही जीवन-वीणा से संगीत पैदा होने का नियम भी है। जीवन-वीणा की भी एक ऐसी अवस्था है, जब न तो उत्तेजना इस तरफ होती है, न उस तरफ। न खिंचाव इस तरफ होता है, न उस तरफ। और तार मध्य में होते हैं। तब न दुख होता है, न सुख होता है। क्योंकि सुख एक खिंचाव है, दुख एक खिंचाव है। और तार जीवन के मध्य में होते हैं-सुख और दुख दोनों के पार होते हैं। वहीं वह जाना जाता है जो आत्मा है, जो जीवन है, जो आनंद है।

आत्मा तो निश्चित ही दोनों के अतीत है। और जब तक हम दोनों के अतीत की आंख को नहीं ले जाते, तब तक आत्मा का हमें कोई कोई अनुभव नहीं होगा।’’

उदयपुर, राजस्थान में ध्यान-प्रयोगों एवं प्रश्नोत्तर पर आधारित इस पुस्तक में सदगुरु ओशो ने महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने विचार प्रकट किये हैं। जीवन में संगीत का राग छेड़ने वाली इस किताब में दस प्रवचनों का संकलन है।

रिबेल पब्लिकेशन हाउस की ओर से किताब का प्रकाशन किया गया है। पुस्तक में कुल 222 पृष्ठ एवं मूल्य 430 रुपये है।

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ढाई आखर प्रेम का

प्रेम नाम का पुष्प जिस हृदय में खिलता है उसकी सुगंध हर जगह मौजूद होती है। उसकी सुवास प्रत्येक पल आनंद की हिलारे मारती रहती हैं। इस किताब में ओशो के द्वारा अपने संन्यासियों एवं मित्रों को दिये गये एक-एक स्नेहपूर्ण पत्रों का भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। ओशो कहते हैं-‘‘प्रेम संबंध नहीं है। वस्तुतः प्रेम का दूसरे से प्रयोजन ही नहीं है। प्रेम ही जीने का एक ढंग। और अप्रेम भी है जीने का ही ढंग। प्रेम है फूल की भांति जीना। अप्रेम है कांटे की भांति जीना। लेकिन, कांटे दूसरों को चुभते हैं-अप्रेम स्वयं की ही छाती में चुभ जाता है। और फूल दूसरों को सुगंध देते हैं-प्रेम स्वयं को ही सुगंध से भर जाता है।’’

साधना पॉकेट बुक्स की ओर से प्रकाशित हिन्दी प्रवचनों की इस किताब में कुल 195 पृष्ठ हैं एवं मूल्य 125 रुपये मात्र है।



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आर्ट ऑफ लिविंग

सजगता और ध्यानपूर्वक जीते हुए जीने की कला को कैसे विकसित किया जा सकता है। जिंदगी के ऐसे महत्वपूर्ण पहलुओं की झलक इस किताब में देखने को मिलती है। अंहिसा, अपरिग्रह, अचैर्य, अकाम तथा अप्रमाद। इन पांच महाव्रतों पर सद्गुरु ओशो के विचारों की बूंद किताब में समाहित है।

पुस्तक के प्रवचन दो भागों में विभाजित किये गये है। पहले भाग में पांच महाव्रतों पर एवं दूसरे खण्ड में मानव व्यवहार और सभ्यता पर ओशो प्रवचनांश दिये गये हैं।

रिबेल पब्लिकेशन हाउस की ओर से प्रकाशित अंग्रेजी प्रवचनों की इस पुस्तक में कुल 385 पृष्ठ एवं मूल्य 365 रुपये मात्र है।


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फाइंडिग योर ओन वे

सद्गुरु ओशो के अंग्रेजी भाषा के प्रवचनों की इस पुस्तक में बुद्ध की देशनाओं पर बोलने वाले ओशो के 42 प्रवचनों के चार खण्डों में से पहला भाग है। जिसमें सद्गुरु ने बुद्ध को आज भी जीवंत, प्रासंगिक, अंतदृष्टि के वैज्ञानिक और मानवीय करुणा से जुड़ा हुआ बताया है। बुद्ध के बताए मार्ग और ज्ञान का प्रकाश जीवन के मंच पर वह शक्ति प्रदान करता है जिसके माध्यम से हम पूरी दुनिया में बदलाव ला सकते है।

प्रस्तुत पुस्तक का प्रकाशन रिबेल पब्लिकेशन हाउस ने किया है। किताब में कुल 283 पृष्ठ एवं मूल्य 600 रुपये हैं।





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दि रिबेलियस स्प्रिट

इस पुस्तक में विद्रोही के बारे में ओशो ने कहा -’’विद्रोही किसी के बताये हुए मार्ग को नहीं अपनाता है, अगर वह किसी का अनुसरण करता है तो वह विद्रोही नहीं है। विद्रोही को किसी मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती है। उसके भीतर जागरण का दीया स्वयं जल रहा होता है’’

यह किताब आपको हिम्मत, हास्य के साथ संसार में संघर्ष करने का साहस प्रदान करती है। अंग्रेजी में संकलित किताब का प्रकाशन रिबेल पब्लिकेशन हाउस ने किया है। पुस्तक में कुल 401 पृष्ठ एवं मूल्य 750 रुपये मात्र हैं।





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स्वर्णिम बचपन-एक बुद्धपुरुष का विद्रोही बचपन

ओशो के जीवन पर आधारित यह पुस्तक हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों संस्करणों में प्रकाशित हुई है। अंग्रेजी में यह पुस्तक ‘ग्लिंप्सेज ऑफ ए गोल्डन चाइल्डहुड’ के नाम से भी उपलब्ध है। हिंदी भाषा में 50 सत्र तथा 23 प्रकरण हैं। इसके बैक कवर का एक उद्धरण यहां उल्लेखनीय हैं: ‘‘बुद्धों की जीवनी लिखी नहीं जा सकती, क्योंकि उनके जीवन के इतने रहस्यपूर्ण बेबूझ तल होते हैं कि वे सब उनके आचरण में प्रतिबिंबित नहीं होते। जीवनी होती है किसी भी व्यक्ति के आस-पास घटी हुई घटनाओं का दस्तावेज़, उन घटनाओं की व्याख्या। अब एक जाग्रत चेतना के आचरण की व्याख्या सोए लोग कैसे करें?’’

इसे ध्यान में रखकर यह किताब पढ़ी जाए, तो ओशो के बचपन की झलकें हमें हमारा अपना जीवन समझने में मदद कर सकती हैं।



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ध्यान विज्ञान

ध्यान में प्रवेश की 115 सहज विधियां

आज 700 से भी अधिक पुस्तकों में संकलित ओशो के हजारों प्रवचनों में अगर आप जानना चाहें कि उनकी अंतर्धारा क्या है, मूलधारा क्या है, तो उसका एक ही सटीक उत्तर है: ध्यान। हम ओशो से कुछ भी पूछें, अथवा वे किसी भी विषय पर क्यों न बोलें, ओशो हमें पुनः-पुनः एक ही मूल बिंदु पर ले आते हैं: ध्यान।

ओशो की यह पुस्तक आपको आनंद के विस्मय-लोक में प्रवेश के लिए एक निमंत्रण है।




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गीता-दर्शन भाग-1 से 8

ओशो ने श्रीमदभगवतगीता के अठारह अध्यायों पर अमृत-प्रवचन दिए हैं जिसके 8 खंड हैं। कुछ ही समय पहले अंग्रेजी संस्करण में इसका पहला भाग प्रकाशित हो चुका है। सद्गुरु ने इन पुस्तकों में जीवन के हर विषयों के साथ-साथ योग और ध्यान पर प्रवचन दिए हैं। ओशो का और उनके प्रवचनों का एक करिश्मा है जो गीता-दर्शन के हर एक भाग में आपको देखने को मिलेगा और एक बार उनकी एक पुस्तक हाथ में ली तो उनकी दूसरी पुस्तकों की ओर जाने की इच्छा को रोक नहीं पाएंगे।






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मिस्टिक ऑफ दि ईस्ट

पूरब के रहस्यदर्शियों पर आधारित यह नव प्रकाशित ओशो पुस्तक ‘‘मिस्टिक ऑफ दि ईस्ट’’ है। दिसम्बर 2012 में ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन तथा नियोगी बुक्स के सहयोग से यह प्रकाशित हुई है। संस्करण में कई पूर्वी रहस्यदर्शियों पर ओशो के प्रवचन दिए गए हैं। इनमें मुख्यतः अतिशा, बाउल फ़कीर, बोधिधर्म, गौतम बुद्ध, कबीर तथा पतंजलि हैं।

पुस्तक के बैक कवर पर ‘दि मसाया, भाग-2’ से ओशो का एक उद्धरण दिया गया है: ‘‘पूरब सदियों से है-शायद हमेशा से-पवित्र, धार्मिक, जीवन का पवित्र स्रोत है। पूरब में केवल सूर्य ही पहले नहीं निकलता, गौतम बुद्ध का भी उदय हुआ है। पूरब ने हज़ारों रहस्यदर्शियों को जन्माया है। इसकी तुलना में पश्चिम बहुत ही गरीब है। वहां केवल महान वैज्ञानिक हुए हैं, पूरब में महान खोजकर्ता हुए हैं, अस्तित्व ने खुद निर्मित किए हैं।’’

पुस्तक में ओशो प्रवचनों के साथ-साथ रहस्यदर्शियों के स्केच भी बनाए गए हैं जिन्हें स्वामी आनंद तीर्थ (सुदी) ने खुद बनाए हैं। सुंदर तथा आकर्षक दिखने वाली पुस्तक ‘मिस्टिक ऑफ दि ईस्ट’ की पृष्ठ संख्या 254 तथा मूल्य 350/- रुपए है।

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कृष्ण स्मृति

ओशो द्वारा कृष्ण के बहु-आयामी व्यक्तित्व पर दी गई 21 वार्ताओं एवं नव-संन्यास पर दिए गए एक विशेष प्रवचन का अप्रतिम संकलन। यही वह प्रवचनमाला है जिसके दौरान ओशो के साक्षित्व में संन्यास ने नये शिखर को छूने के लिए उत्प्रेरणा ली और ‘नव-संन्यास अंतर्राष्ट्रीय’ की संन्यास-दीक्षा का सूत्रपात हुआ। इस अद्भुत पुस्तक को पढ़िए और आनंदित होइए।







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एक ओंकार सतनाम

गुरु नानकदेवजी के जपुजी पर ओशो द्वारा दिए गए बीस अमृत प्रवचनों का अनुपम संकलन है। गुरुनानक के लोकप्रिय, गीतवाही वचन ‘जपुजी’ एक अद्वितीय काव्य है; उतना ही अद्वितीय जितनी कि ओशो द्वारा की हुई उन वचनों की व्याख्या। उसे व्याख्या कहना ठीक नहीं है, मानो नानक देव इक्कीसवीं सदी में फिर प्रकट हुए और ओशो के मुख से अपने ही सूत्रों को उन्होंने नवजीवन दिया।







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संभोग से समाधि की ओर

प्रस्तुत पुस्तक ओशो द्वारा दिए गए जीवन-ऊर्जा रूपांतरण के विज्ञान पर अठारह प्रवचनों का अनूठा संकलन है। इसकी भूमिका विश्वविख्यात कवयित्री, लेखिका ‘अमृता प्रीतम’ ने लिखी है। भूमिका की एक पंक्ति में उन्होंने बताया है: मैं समझती हूं कि ओशो हमारे युग की एक बहुत बड़ी प्राप्ति हैं, जिन्होंने सूरज की किरण को लोगों के अंतर की ओर मोड़ दिया, और सहज मन से उस संभोग की बात कह पाए...जो एक बीज और एक किरण का संभोग है, और जिससे खिले हुए फूल की सुगंध इंसान को समाधि की ओर ले जाती है, मुक्ति की ओर ले जाती है, मोक्ष की ओर ले जाती है।’’






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पथ के प्रदीप

‘‘इस जगत में कौन है जो शांति नहीं चाहता? लेकिन न लोगों को इसका बोध है और न वे उन बातों को चाहते हैं जिनसे कि शांति मिलती है। अंतरात्मा शांति चाहती है लेकिन हम जो करते हैं, उससे अशांति ही बढ़ती है। स्मरण रहे कि महत्वाकांक्षा अशांति का मूल है। जिसे शांति चाहनी है, उसे महत्वाकांक्षा छोड़ देनी पड़ती है। शांति का प्रारंभ वहां से है, जहां कि महत्वाकांक्षा अंत होती है।’’ संबुद्ध रहस्यदर्शी ओशो के इस उद्धरण के साथ प्रस्तुत पुस्तक ‘‘लाइफ इज़ ए सोप बबल’’ का प्रथम पृष्ठ शुरू होता है।

हिंदी से अंग्रेजी में अनुवादित यह पुस्तक पुणे से प्रकाशित हुई है। हिंदी में, वर्ष 1965 में इसका पहला संस्करण प्रकाशित हुआ-‘पथ के प्रदीप’-ओशो द्वारा मा योग सोहन को लिखे गए 100 अमृत पत्रों का संकलन।

ओशो के प्रेम और करुणा से निकले हुए ये पत्र अपने आप में अद्वितीय हैं। इससे अनेक लोगों के जीवन-पथ पर प्रकाश फैलेगा।

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दि डायमंड सोर्ड

अंग्रेजी की यह पुस्तक ओशो द्वारा मनाली एवं बंबई में प्रश्नोत्तर सहित दिए गए 14 अमृत प्रवचनों का अनमोल संकलन है जो कि पुणे से प्रकाशित हुई है।

संस्करण में ओशो ने हमारे दैनिक जीवन से जुड़े अनेकों महत्वपूर्ण विषयों पर प्रवचन दिए हैं। इसकी भूमिका भी ओशो की बहुचर्चित पुस्तकः ‘दि धम्मपदः दि वे ऑफ दि बुद्धा’’ के खंड 12 से ली गई है। प्रस्तावना के एक उद्धरण में ओशो कहते हैं: ‘‘ध्यान से अधिक बड़ा और कोई जादू नहीं है। नकारात्मक से सकारात्मक का रूपांतरण, अंधकार से प्रकाश का रूपांतरण, यही जादू है ध्यान का। स्पंदन करते हुए व्यक्ति का भयमुक्त आत्मा में परिवर्तित होना, हर उस एक व्यक्ति का परिवर्तन जो अपनी मूर्खता के कारण प्रत्येक चीज़ों को पकड़ लेता है, कब्जा कर लेता है, ध्यान से ही उसे पता चलता है क्या होता है। बुद्ध ने कहा हैः ध्यान एक बड़ी महान तलवार है, तुम्हारी अनेक बाधाओं को यह जड़ से काटती है।’’

हिंदी के पाठक ‘‘कोंपलें फिर फूट आईं’’ तथा ‘‘फिर अमृत की बूंद पड़ी’’ संस्करण में इन प्रवचनों को पढ़ सकते हैं।

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करेज दि जॉय ऑफ लिविंग डेंज्रसली

ओशो की पुस्तक ‘करेज-दि जॉय ऑफ लिविंग डेंज्रसली’-न्यूयार्क की प्रसिद्ध प्रकाशन संस्था सेंट मार्टिन प्रेस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक उन सभी ध्यानी साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है जो अपनी ध्यान-साधना का शुभारंभ कर रहे हैं अथवा साधना पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। यह पुस्तक सबके लिए पाथेय की भूमिका निभाती है।

इसकी भूमिका में जीवन के संबंध में दो बिंदु एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाने को कहते हैं जो जीवन को एक ठोस आधार देता है:

1. अनिश्चितता न कहें-विस्मय कहें।
2. असुरक्षा न कहें-स्वतंत्रता कहें। शिवसूत्र में भी विस्मय को योग की भूमिका कहा गया है। और असुरक्षा में जीना संन्यास का मूल सूत्र है, ओशो ने जिसकी चर्चा अपने सैकड़ों प्रवचनों में की है। संन्यास के लिए साहस और स्वतंत्रता मुख्य बिंदु हैं।

200 पृष्ठों की पेपरबैक पुस्तक में इस विषय पर ओशो के महत्वपूर्ण प्रवचनांशों के अतिरिक्त कुछ विशेष प्रश्नोत्तर भी संकलित किए गए हैं तथा भयमुक्त होने के लिए ध्यान-प्रयोग भी।

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क्या मनुष्य एक यंत्र है?

प्रस्तुत पुस्तक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्रास मैदान, मुंबई में ओशो द्वारा दिए गए चार अमृत प्रवचनों का अपूर्व संकलन है। 92 पन्नों से सुसज्जित पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु यहां उल्लेखनीय हैं-

क्या आप अपने विचारों के मालिक हैं?
वे कौन सी परतंत्रताएं हैं जो मनुष्य के जीवन को सब ओर से घेरे हुए रहती हैं?
क्या है भय का मनोविज्ञान?
जाग्रत चित्त सत्य की और स्वयं की खोज का द्वार है
जागरूकता क्या है?




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वर्क इज़ लव मेड विज़िबल

अंग्रेजी भाषा में यह नव-प्रकाशित पुस्तक ओशो के कार्य के प्रचार-प्रसार में संलग्न कार्यकताओं के साथ ओशो की लोनावला, नारगोल, मुंबई तथा माथेरान में हुई 14 अंतरंग चर्चाओं का अनूठा संकलन है।

हिंदी के पाठक इन प्रवचनों को ‘अनंत की पुकार’ में पढ़ सकते हैं। इस पुस्तक की पृष्ठ संख्या 257 है। ‘अनंत की पुकार’ पुस्तक का यह उद्धरण उल्लेखनीय हैः ‘‘आनंद को कोई खोज नहीं सकता। न ही आनंद कहीं मिलता है कि कोई चला जाए और भर लाए। न ही आनंद कोई दे सकता है किसी को। लेकिन दुख को हम खोजते हैं, दुख को हम इकट्ठा करते हैं, दुख की हम गांठ बांध लेते हैं और दुखी होते रहते हैं।’’





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भारत: समस्याएं व समाधान

यह पुस्तक एक अपूर्व निमंत्रण है-एक ऊर्जस्वी, साहसिक, प्राणवान, जागरूक भारत के निर्माण के लिए, उस भूमिका के लिए जो भारत को विश्व के रंगमंच पर निभानी है।

स्वामी सत्य वेदांत द्वारा, पुस्तक में संकलित ओशो के प्रवचन सभी पाठकों को नयी चेतना, नयी दृष्टि और साहस प्रदान करेंगे तथा एक नए भारत, नए विश्व के निर्माण में सहयोगी बनने की क्षमता देंगे। ओशो का संदेश है: नया मनुष्य। नया मनुष्य ही एक नए जीवंत जगत के सृजन में अत्यंत आवश्यक है। ये नए भारत के भी निर्णायक क्षण हैं।





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हिन्दी और अंग्रेजी का यह ओशो साहित्य बिक्री हेतु नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, ओशोधाम, और ओशो राजयोग ध्यान केन्द्र के अतिरिक्त हमारी आॅनलाइन वेबसाइट www.oshoworldgalleria.com पर भी उपलब्ध है।