Osho World Online Hindi Magazine :: January 2012
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हंसता हुआ धर्म

जीवन हंसने-हंसाने का अवसर है। आदमी खुद पर हंस नहीं सकता, क्योंकि वह मूर्ख बनने से डरता है। लेकिन मूर्खता में क्या खराबी है? ज्ञानी बनने की बजाय मूर्ख बनकर जीना ज्यादा बेहतर है। सच्चा मूर्ख वह है जो किसी बात को गंभीरता से नहीं लेता। मूर्ख आदमी अकारण हंसता रहता है। उसमें मिथ्या अहंकार नहीं होता। वह सहज, सरल होता है। यह बहुत बड़ा वरदान है। क्योंकि हमारी जिंदगी इतनी बोझिल है कि हंसने के कारण खोजने जाएं तो मिलने बहुत मुश्किल हैं। जो अकारण हंस सकता है उसका जीवन मधुमास बन जाता है; उसके जीवन में आनंद की फुलझड़ियाँ छूटती हैं। अकारण ही।

-ओशो

  • एक नए स्टेनोग्राफर को बुला कर साहब ने लंबा पत्र लिखवाया और अंत में कहा--‘‘कुछ पूछना है?’’ ‘‘जी, जरा ये बता दीजिए कि ‘प्रिय मित्र’ और ‘सदैव आपका’ के बीच क्या बोले थे?’’ स्टेनोग्राफर ने पूछा।

  • संतरी के काम के लिए एक व्यक्ति ट्रेनिंग ले रहा था। उसे बताया गया कि वह केवल ऐसी ही करों को अंदर आने दे, जिन पर एक खास तरह का निशान हो। अचानक उसे एक बिना निशान वाली कार आती दिखाई दी।
    संतरी ने रोकने पर उसमें बैठे उच्चाधिकारी ने कार बढ़ाने की आज्ञा दी।
    एक मिनट साहब! नया संतरी सैल्यूट मारकर बोला--दरअसल इस काम के लिए मैं नया हूं। यह बताइए कि गोली मैं आप पर चलाऊं या आपके ड्राइवर पर?

  • दफ्तर में आई एक नई टाइपिस्ट ने दूसरे कोने में बैठी एक खूबसूरत लड़की से पूछा--तुम हमेशा निठल्ली क्यों बैठी रहती हो?
    बॉस को यही पसंद है। मेरा विभाग शिकायतों का विभाग है।

  • ‘‘तुमने अपनी खूबसूरत रिसैप्शनिस्ट को नौकरी से क्यों निकाल दिया?’’ एक व्यक्ति ने अपने डॉक्टर मित्र से पूछा।
    ‘‘मेरा धंधा बिगड़ रहा था उसकी वजह से।’’ डॉक्टर बोला।
    ‘‘अच्छा! वह कैसे?’’
    ‘‘मैंने अपने कई मरीजों को कहते सुना था कि उनकी आधी बीमारी तो उसकी एक मुस्कुराहट से ही दूर हो जाती थी।’’

  • सूचना विभाग मंत्रालय से संबंधित एक व्यक्ति की सालीजी मेहमान बन आई हुई थी।
    नगर में प्रेस वर्कर्स की हड़ताल के कारण जब सालीजी को सुबह अखबार नहीं मिला तो उन्होंने जीजाजी के सेक्रेटरी को बुलाकर पूछा--अखबार न आने की वजह?
    प्रेस वर्कर्स की हड़ताल।
    जीजाजी के पद का रौब गालिब करने के इरादे से सालीजी ने समाचार पत्र के संपादक को फोन किया। उधर से भी वही जवाब मिला--प्रेस में हड़ताल हो गई है। अतः पांच-सात दिन अखबार नहीं छप सकता।
    जवाब में सालीजी बोलीं--जब आपको पता था कि हड़ताल है तो आपने पहले ही बहुत से अखबार छपवाकर क्यों नहीं रख लिए थे?

  • एक बहुत बड़ी कंपनी के डायरेक्टर मेटरनिटी होम में पत्नी के बच्चा होने की राह देख रहे थे। बैठे-बैठे उसने अपना ब्रीफकेस खोला और दफ्तर की फाइलें पढ़ने में तल्लीन हो गया, तभी साली ने आकर प्रसन्नता भरी सूचना दी--जीजाजी.....लड़का।
    डायरेक्टर साहब अपने खयालों में खोए हुए थे। फाइल पर निगाह जमाए बोले--उनसे कहो, कल आना, इस समय मैं व्यस्त हूं।

  • नेता (डाक्टर से)--मेरी रिपोर्ट जरा मेरी भाषा में समझाने की कृपा करें।
    डाक्टर--तो सुनिए, मेरी रिपोर्ट के अनुसार आपका ब्लड प्रेशर घोटालों की तरह बढ़ रहा है, फेफड़े झूठे आश्वासन दे रहे हैं तथा हृदय त्याग-पत्र देने वाला है।