Osho World Online Hindi Magazine :: July 2012
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ओशो दर्शन
गुरु एक संगम है

गुरु चैतन्य की मूर्ति निखारता है-बड़ा नाजुक है। और नाजुकता यही है कि गुरु को विपरीत काम करने पड़ते हैं। एक तरफ तुम घबड़ाकर गिर ही न जाओ, दूसरी तरफ तुम कहीं इतने आश्वस्त भी न हो...

गुरु होश में लाता है

गुरु का एक ही अर्थ हैः तुम्हारी नींद को तोड़ देना। तुम्हें जगा दे, तुम्हारे सपने बिखर जाएं, तुम होश से भर जाओ

नींद बहुत गहरी है। शायद नींद कहना भी ठीक...

गुरु बिन ज्ञान नाहीं

बुद्ध अदभुत गुरु हैं। बुद्ध दोनों बातें कहते हैं। कहते हैः गुरु के संग ज्ञान नहीं होगा। और दीक्षा देते है! और शिष्य बनाते हैं! और कहते हैः किसको शिष्य बनाऊं? कैसे शिष्य बनाऊं? मैंने खुद भी...

गुरु पूर्णिमा विशेष

आषाढ़-पूर्णिमा
ये मेघ साहसिक सैलानी

-स्वामी चैतन्य कीर्ति
फिर घिर आए हैं आषाढ़ के बादल-चांद भी आया है। चांद तो सदा है, आषाढ़ के बादल केवल आषाढ़ में आते हैं और आषाढ़ भी कभी-कभी आता हैं। यद्यपि नियमित आता है। ऐसा ही कुछ गुरु-शिष्य का मिलन है।

गुरु की उपस्थिति चांद जैसी है। गुरु उपस्थित है, जैसे चांद उपस्थित है। बादल उमड़-घुमड़ कर आ रहे हैं, शिष्य भी सभी दिशाओं से उमड़-घुमड़ कर आ रहे हैं। यह संगम बहुत आर्द्र है। यह सम्मिलन बहुत भावभीना है। यह सत्संग अमृत की वर्षा लिए है, आनंद के आंसू लिए है। कहीं कुछ कंजूसी नहीं है। बाढ़ आयी है करूणा की-और ह्दय-घट सर्वथा सीधे और खुलें हैं मस्ती का पारावार नहीं रहा।

यह दर्शकों की बात नहीं है। चांदनी के आनंद में भीगना साहसी प्रेमी शिष्यों की पात्रता है। और जो शिष्य होकर सदगुरु के आनंद में भीगता है वही बरसता है मेघ बनकर।

ये मेघ साहसिक सैलानी!
ये तरल वाष्प से लदे हुए
द्रुत सासों से लालसा-भरे,
ये ढीठ समीरण के झोंके...

ओशो अमृत-पत्र

जीवन की सार्थकता के लिए स्वयं को जानो

आत्मज्ञान एकमात्र ज्ञान है। क्योंकि, जो स्वयं को ही नहीं जानते, उनके और सब कुछ जानने का मूल्य ही क्या है?
मनुष्य की सबसे बड़ी कठिनाई मनुष्य का अपने ही प्रति अज्ञान है। दीये के ही नीचे जैसे अंधेरा होता है, वैसे ही मनुष्य उस सत्ता के ही प्रति अंधकार में होता है, जो कि उसकी आत्मा है। हम स्वयं को ही नहीं जानते हैं, और तब यदि हमारा सारा जीवन ही गलत दिशाओं में चला जाता हो, तो आश्चर्य करना व्यर्थ है। आत्मज्ञान के अभाव में जीवन उस नौका की भांति है...

ध्यान-विधि

ओम्

शिव ने कहाः ओम् जैसी किसी ध्वनि का धीमे-धीमे गुंजार करो। जैसे-जैसे ध्वनि पूर्णध्वनि में प्रवेश करती है वैसे-वैसे साधक भी

‘‘ओम जैसी किसी ध्वनि का धीमे-धीमे गुंजार करो।’’ उदाहरण के लिए ओम् को लो। यह आधारभूत ध्वनियों में से एक है। अ उ और म-ये तीन ध्वनियां ओम् में सम्मिलित हैं...

 ओशो कथा-सागर

अहंकार को संतुष्टि नहीं!

अहंकार बड़े आश्वासन देता है, पूरे कभी नहीं करता, कर सकता नहीं। अहंकार बिल्कुल नपुसंक है।
मैंने एक कहानी सुनी है...


एक आदमी को शिव की पूजा करते-करते और रोज शिव का सिर खाते-खाते....क्योंकि पूजा और क्या है, सिवाय सिर खाने के। एक ही धुन, एक ही रट कि हे प्रभू, कुछ ऐसी चीज दे दो कि जिंदगी में मजा आ जाए। एक ही बार मांगता हूं...

ओशो का ओशनिक साहित्य

Sankalp Sadhna ज़ेन की घोषणा
स्वयं से मुक्ति


ज़ेन सदगुरुओं पर आधारित ‘ज़ेन की घोषणा स्वयं से मुक्ति’ ओशो की अंग्रेजी पुस्तक का हिंदी अनुवाद है। जिसके अनुवादक है ओशो की अंग्रेजी पुस्तकों का निरन्तर अनुवाद करने वाले स्वामी ज्ञानभेद। पुस्तक का प्रकाशन डायमंड बुक्स पब्लिकेशन ने किया है...

रहस्यदर्शियों पर ओशो

पलटूदास

संत तो पक्षियों जैसे होते हैं। आकाश पर उड़ते जरूर हैं, लेकिन पदचिन्ह नहीं छोड़ जाते

अजहूं चेत गंवार! नासमझ! अब भी चेते! ऐसे भी बहुत देर हो गई। जितनी न होनी थी, ऐसे भी उतनी देर हो गई। फिर भी, सुबह का भूला सांझ घर आ जाए तो भूला नहीं...

स्वास्थ्य

मनुष्य की चेतना भीतर से कब स्वस्थ होती है?

ध्यान का पहला अर्थ है कि हम अपने शरीर और स्वयं के प्रति जागना शुरू करें। यह जागरण अगर बढ़ सके तो आपका मृत्यु-भय क्षीण हो जाता है। और जो चिकित्सा-शास्त्र मनुष्य को मृत्यु के भय से मुक्त नहीं कर सकता...

ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर

गुरु पूर्णिमा महोत्सव
3 जुलाई, 2012
संचालन - मा धर्म ज्योति और स्वामी चैतन्य कीर्ति
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340

 गतिविधियां

ओशो वर्ल्ड गैलेरिया

कबीर-उत्सव

कबीर दिवस के उपलक्ष्य में 28 मई संध्या 6.00 बजे ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में कबीर भजन संध्या का उत्सव मनाया गया। मा धर्म ज्योति ने ओशो के समक्ष दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरूआत की...

ओशोधाम

बुद्ध पूर्णिमा उत्सव

ओशोधाम में 04 से 06 मई तक बुद्ध पूर्णिमा उत्सव मनाया गया जिसका संचालन स्वामी चैतन्य कीर्ति ने किया...

सन्यास जगत

राजकोट, गुजरात

बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 1 मई को नव-निर्मित ‘‘ओशो मधुबन’’ ध्यान केंद्र का शुभारंभ हुआ। साथ-ही केंद्र में एक दिवसीय ध्यानोत्सव आयोजित किया गया जिसमें 250 साधकों ने हिस्सा लिया...

विशेष रिपोर्ट

नोएडा, उत्तर प्रदेश में ओशो फिल्म शो

27 मई को ओशो जीवन दर्शन पर आधारित ओशो फिल्म शो का आयोजन नोएडा के एक कम्यूनिटी सेंटर में किया गया...

समाचार पत्रों में ओशो-वाणी

एक पत्ती वृक्ष में हिल रही है...

‘‘एक पत्ती वृक्ष में हिल रही है, क्या उससे ज्यादा आपका होना है? देखें जीवन को, देखें दूर तक फैले आकाश को, करोड़-करोड़ सूर्यों...

टैरो-मार्ग दर्शन

जुलाई 2012
-मा दिव्यम नदीशा

‘‘मैं यह कहता हूं कि इसकी फिक्र ही मत करना कि पाप को हम कैसे पुण्य बनाएं, असंयम को संयम कैसे बनाएं, हिंसा को अहिंसा कैसे बनाएं, कठोरता को दया कैसे बनाएं। इस चक्कर में ही मत पड़ना। सवाल यह है ही नहीं कि हम क्रिया को कैसे बदलें, सवाल यह है कि कर्ता कैसे रूपांतरित हो। अगर कर्ता बदल जाता है तो क्रिया अनिवार्यरूपेण बदल जाती है, क्योंकि तब कुछ चीज़ें करने में असमर्थ...

हास्य-ध्यान

"आनंदित व्यक्ति में व्यक्तित्व होता है; दुखी व्यक्ति में कोई व्यक्तित्व नहीं होता। दुखी व्यक्ति भीड़ का हिस्सा होता है; आनंदित व्यक्ति व्यक्ति होता है, उसमे एक निजता होती है। और आनंदित व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता को किसी भी मूल्य पर खोने को राजी नहीं हो सकता, क्योंकि वह जानता है उसका आनंद भी उसी क्षण खो जाएगा जिस क्षण स्वतंत्रता खोएगी।" -ओशो

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