Osho World Online Hindi Magazine :: July 2012
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ओशो का ओशनिक साहित्य
ज़ेन की घोषणा
स्वयं से मुक्ति

ज़ेन सदगुरुओं पर आधारित ‘ज़ेन की घोषणा स्वयं से मुक्ति’ ओशो की अंग्रेजी पुस्तक का हिंदी अनुवाद है। जिसके अनुवादक है ओशो की अंग्रेजी पुस्तकों का निरन्तर अनुवाद करने वाले स्वामी ज्ञानभेद। पुस्तक का प्रकाशन डायमंड बुक्स पब्लिकेशन ने किया है।

ज़ेन के महत्व पर प्रकाश डालने वाली यह पुस्तक अपने आप में दिव्य है। जिसका अवलोकन करने पर ज्ञान की एक अलग ही किरण फूटती है। इससे पहले भी ज़ेन पर पश्चिमीकरण ने अपना प्रभाव दिखाया लेकिन उसमें उतनी सुंदरता नहीं दिखी। कारण साफ है कि वे उसमें डूबे नहीं, बाहर से ही अनुमान लगा बैठे। जबकि ज़ेन में जाने के लिए जरूरत है डूबने की, खोजने की। ओशो कहते हैं-कि यह घोषणा पत्र बेहद जरूरी है, जिससे पूरे विश्व को यह स्पष्ट हो जाए कि ज़ेन, बुद्धि का कोई कार्य व्यापार न होकर अमन की शून्यता है। वह है सर्वोच्च खिलावट। मैं ज़ेन को सारभूत रूप से, स्वयं से मुक्त होना कहता हूं।

ओशो की इस पुस्तक में अनोखापन इसलिए भी झलकता है क्योंकि यह ओशो के प्रवचन की अंतिम प्रवचन माला है। जिसमें अनेक ज़ेन सदगुरुओं के अदभुत, बोधपूर्ण प्रसंग है। जिससे हम अपने केन्द्र पर पहुंचने और स्वयं से मुक्त होने में कारगर सिद्ध हो सकते है।

ओशो संन्यासियों और प्रेमियों के लिए यह पुस्तक ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, अंसल प्लाजा नई दिल्ली में विक्रय के लिए उपलब्ध है।