Osho World Online Hindi Magazine :: June 2012
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ओशो दर्शन
कुतूहल, जिज्ञासा और मुमुक्षा

मुमुक्षा गुरु को खोजता है; जिज्ञासु शास्त्र को खोजता है; कुतूहली किसी से भी पूछ लेता है।
ये जो वचन इस समाधि शिविर में हम कबीर के लेने जा रहे हैं, उनका शीर्षक है: ‘सुनो भई साधो...

सुमिरण सुमिरण के भेद

पहले में लगता है: गुरु-प्रांरभ; राम-पूर्णता। दूसरे में लगता हैः राम — प्रांरभ। गुरु-पूर्णता। यह सुमिरण सुमिरण के भेद के कारण फर्क पड़ रहा है...

चैतन्य की बढ़ती ज्योति

तो कितना ही तुम बांधो शीर्षासन, सिद्धासन, सर्वांगासन करो, कितने ही बंध साधो, कितने ही शरीर को इरछा-तिरछा करो — वह बात बहुत महत्वपूर्ण नहीं है...

कबीर परम विद्रोही हैं

कबीर के इन वचनों को समझना बड़ा क्रांतिकारी होगा। तुम भरोसा ही न करोगे कि ऐसी बात संत कह सकेंगे। लेकिन संत ही ऐसी बात कह सकते हैं। क्योंकि वे ही परम...

आत्मा का यौवन

एक और भी जवानी जिसकी कबीर बात कर रहे हैं। एक और यौवन है जो आत्मा का है। एक और यौवन है जो परम सत्ता का है - वह शाश्वत है। वहां बाढ़ चढ़ती है और उतरती नहीं...

नक्सलवाद: रिवोल्यूशन या...

नक्सलाइट पुराने ढांचे के प्रति एक क्रोधपूर्ण प्रतिक्रिया है। वह क्रोध उस सीमा पर पहुंच गया है, जहां वह यह नहीं देखता है कि क्या करना है, क्या छोड़ देना है...

ओशो अमृत-पत्र

सत्य के लिए प्रज्वलित प्यास ही पथ है

सत्य की साधना सतत है। श्वास-श्वास जिसकी-साधना बन जाती है, वही उसे पाने का अधिकारी होती है।
सत्य की आकांक्षा अन्य आकांक्षाओं के साथ एक आकांक्षा नहीं है। अंश मन से जो उसे चाहता है, वह चाहता ही नहीं। उसे तो पूरे और समग्र मन से ही चाहना होता है। मन जब अपनी अखंडता में उसके लिए प्यासा होता है, तब वह प्यास ही सत्य तक पहुंचने का पथ बन जाती है। स्मरण रहे कि सत्य के लिए प्रज्वलित प्यास ही पथ है...

ध्यान-विधि

दौड़ना, जागिंग और तैरना

जब तुम गति में होते हो तो सजग रह पाना स्वाभाविक और सरल होता है। जब तुम शांत बैठे होते हो स्वाभाविक है कि सो जाओ। जब तुम अपने बिस्तर पर लेटे होते हो तो सजग रह पाना बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि पूरी परिस्थिति तुम्हें सोने में मदद करती है। लेकिन सक्रियता में स्वभावतः तुम सो नहीं सकते, तुम अधिक सजग होकर कार्य करते हो। समस्या एक यही है कि कृत्य यांत्रिक बन सकता है।

 ओशो कथा-सागर

विचार, स्वप्न-मन की धूल हैं

एक झेन कथा है।
एक युवक अपने गुरु के पास वर्षों रहा, और गुरु कभी उसे कुछ कहा नहीं। बार-बार शिष्य पूछता कि मुझे कुछ कहें, आदेश दें, मैं क्या करूं? गुरु कहता, मुझे देखो। मैं जो करता हूं, वैसा करो। मैं जो नहीं करता हूं, वह मत करो, इससे ही समझो। लेकिन उसने कहा, इससे मेरी समझ में नहीं आता, आप मुझे कहीं और भेज दें। झेन-परंपरा में ऐसा होता है कि शिष्य मांग सकता है कि मुझे कहीं भेज दें, जहां में सीख सकूं। तो गुरु ने कहा, तू जा, पास में एक सराय है कुछ मील दूर, वहां तू रुक जा, चौबीस घंटे ठहरना और सराय का मालिक तुझे काफी बोध देगा।

जीवन का रूपांतरण - मा आत्मो क्रांति

Ma Atmo Krantiओशो में सब कुछ समाहित है

हरमनप्रीत कौर जिनके संन्यास का नाम मा आत्मो क्रांति है और इस समय वह ऋषिकेश में रहती हैं, उन्होंने अपने संन्यास जीवन और ओशो से जुड़ने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ओशो वर्ल्ड पत्रिका के लिए दी हैं जो उल्लेखनीय हैं। ओशो से आपका प्रथम कैसे जुड़ना हुआ, पूछे जाने पर उन्होंने बताया...

ओशो का ओशनिक साहित्य

Sankalp Sadhna संकल्प साधना
वही गीत: संगीत नया और साज भी


यह पुस्तक ‘महावीर-वाणी’ पर ओशो द्वारा दिए गए कुल 54 प्रवचनों में से 28 से 40 प्रवचनों का संकलन है। पुस्तक के प्रकाशक हैं डायमंड बुक्स।
इस पुस्तक की भूमिका स्वामी चैतन्य कीर्ति ने लिखी है: ‘‘महावीर-वाणी के सूत्रों पर ओशो के प्रवचनों का यह तीसरा संकलन है: संकल्प साधना...

रहस्यदर्शियों पर ओशो

Kabirकबीर

कबीर जीवन के लिए बड़ा गहरा सूत्र हो सकते हैं। इसे तो पहले स्मरण में ले लें। इसलिए कबीर को मैं अनूठा कहता हूं। महावीर सम्राट के बेटे हैं; कृष्ण भी, राम भी, बुद्ध भी; वे सब महलों से आये हैं। कबीर बिलकुल सड़क से आये हैं; महलों से उनका कोई भी नाता नहीं है...

स्वास्थ्य

मेडिसिन और मेडिटेशन

अंग्रेजी के शब्द मेडिसिन और मेडिटेशन दोनों एक ही मूल से आते हैं। दोनों का मूल एक ही है क्योंकि दोनों से उपचार होता है। मेडिटेशन भीतर से उपचार करती है और मेडिसिन बाहर से...

ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर

नो माइंड ग्रुप
15 से 21 जून, 2012 तक
संचालन - स्वामी अविनाश भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340

 गतिविधियां

ओशो वर्ल्ड गैलेरिया

बुद्ध पूर्णिमा सप्ताह

बुद्ध पूर्णिमा सप्ताह के अंतर्गत 26 अप्रैल की संध्या ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में ध्यानोत्सव का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुआ। उत्सव के प्रारंभ में उपस्थित साधकों ने मौन-ध्यान के साथ भगवान बुद्ध पर ओशो के प्रवचनों को सुना...

ओशोधाम

ध्यान और उत्सव की जीवन-शैली

ओशोधाम में 2 से 5 अप्रैल को स्वामी अमित सरस्वती तथा मा प्रेम देवयानी ने मेडिटेट-सेलिब्रेट शिविर का संचालन किया...

सन्यास जगत

सोलन, हिमाचल प्रदेश

12 से 15 अप्रैल एक त्रि-दिवसीय साधना शिविर लगा। ध्यान में स्थानीय मित्रों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के प्रेमी भी एकत्रित हुए...

गुड़गांव, हरियाणा

ओशो फिल्म शो

दिनांक 6 मई की संध्या गुड़गांव स्थित सेक्टर 29 के हुडा ज़िमखाना क्लब में एक तीन घंटे की फिल्मोत्सव का महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुआ...

विशेष रिपोर्ट

विधानसभा पुस्तकालय के लिए ओशो साहित्य भेंट

विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार 4 मई को विधानसभा पुस्तकालय के लिए ओशो की 246 पुस्तकों का एक सेट भेंट किया...

समाचार पत्रों में ओशो-वाणी

ज्योति में ज्योति समानी

‘‘ज्योतिष की सर्वाधिक गहरी मान्यताएं भारत में पैदा हुईं। सच तो यह है कि ज्योतिष की गणना के लिए ही सबसे पहले गणित का जन्...

हास्य-ध्यान

"हास्य की क्षमता स्वयं की ओर इंगित होनी चाहिए - स्वयं पर हंसना बहुत बड़ी बात है और जो स्वयं पर हंस सकता है वह धीरे-धीरे दूसरों के प्रति करूणा और उत्तरदायित्व से भर जाता है पूरी दुनिया में कोई घटना, कोई विषय हास्य को इस भांति से नहीं लेता है।"

ओशो

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