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| ओशो दर्शन |
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| ओशो अमृत-पत्र |
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सत्य के लिए प्रज्वलित प्यास ही पथ है
सत्य की साधना सतत है। श्वास-श्वास जिसकी-साधना बन जाती है, वही उसे पाने का अधिकारी होती है।
सत्य की आकांक्षा अन्य आकांक्षाओं के साथ एक आकांक्षा नहीं है। अंश मन से जो उसे चाहता है, वह चाहता ही नहीं। उसे तो पूरे और समग्र मन से ही चाहना होता है। मन जब अपनी अखंडता में उसके लिए प्यासा होता है, तब वह प्यास ही सत्य तक पहुंचने का पथ बन जाती है। स्मरण रहे कि सत्य के लिए प्रज्वलित प्यास ही पथ है...
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| ध्यान-विधि |
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दौड़ना, जागिंग और तैरना
जब तुम गति में होते हो तो सजग रह पाना स्वाभाविक और सरल होता है। जब तुम शांत बैठे होते हो स्वाभाविक है कि सो जाओ। जब तुम अपने बिस्तर पर लेटे होते हो तो सजग रह पाना बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि पूरी परिस्थिति तुम्हें सोने में मदद करती है। लेकिन सक्रियता में स्वभावतः तुम सो नहीं सकते, तुम अधिक सजग होकर कार्य करते हो। समस्या एक यही है कि कृत्य यांत्रिक बन सकता है। |
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| ओशो कथा-सागर |
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विचार, स्वप्न-मन की धूल हैं
एक झेन कथा है।
एक युवक अपने गुरु के पास वर्षों रहा, और गुरु कभी उसे कुछ कहा नहीं। बार-बार शिष्य पूछता कि मुझे कुछ कहें, आदेश दें, मैं क्या करूं? गुरु कहता, मुझे देखो। मैं जो करता हूं, वैसा करो। मैं जो नहीं करता हूं, वह मत करो, इससे ही समझो। लेकिन उसने कहा, इससे मेरी समझ में नहीं आता, आप मुझे कहीं और भेज दें। झेन-परंपरा में ऐसा होता है कि शिष्य मांग सकता है कि मुझे कहीं भेज दें, जहां में सीख सकूं। तो गुरु ने कहा, तू जा, पास में एक सराय है कुछ मील दूर, वहां तू रुक जा, चौबीस घंटे ठहरना और सराय का मालिक तुझे काफी बोध देगा।
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| जीवन का रूपांतरण - मा आत्मो क्रांति |
ओशो में सब कुछ समाहित है
हरमनप्रीत कौर जिनके संन्यास का नाम मा आत्मो क्रांति है और इस समय वह ऋषिकेश में रहती हैं, उन्होंने अपने संन्यास जीवन और ओशो से जुड़ने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ओशो वर्ल्ड पत्रिका के लिए दी हैं जो उल्लेखनीय हैं। ओशो से आपका प्रथम कैसे जुड़ना हुआ, पूछे जाने पर उन्होंने बताया... |
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| ओशो का ओशनिक साहित्य |
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संकल्प साधना
वही गीत: संगीत नया और साज भी
यह पुस्तक ‘महावीर-वाणी’ पर ओशो द्वारा दिए गए कुल 54 प्रवचनों में से 28 से 40 प्रवचनों का संकलन है। पुस्तक के प्रकाशक हैं डायमंड बुक्स।
इस पुस्तक की भूमिका स्वामी चैतन्य कीर्ति ने लिखी है: ‘‘महावीर-वाणी के सूत्रों पर ओशो के प्रवचनों का यह तीसरा संकलन है: संकल्प साधना...
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| रहस्यदर्शियों पर ओशो |
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कबीर
कबीर जीवन के लिए बड़ा गहरा सूत्र हो सकते हैं। इसे तो पहले स्मरण में ले लें। इसलिए कबीर को मैं अनूठा कहता हूं। महावीर सम्राट के बेटे हैं; कृष्ण भी, राम भी, बुद्ध भी; वे सब महलों से आये हैं। कबीर बिलकुल सड़क से आये हैं; महलों से उनका कोई भी नाता नहीं है... |
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| स्वास्थ्य |
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मेडिसिन और मेडिटेशन
अंग्रेजी के शब्द मेडिसिन और मेडिटेशन दोनों एक ही मूल से आते हैं। दोनों का मूल एक ही है क्योंकि दोनों से उपचार होता है। मेडिटेशन भीतर से उपचार करती है और मेडिसिन बाहर से... |
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| ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर |
नो माइंड ग्रुप
15 से 21 जून, 2012 तक
संचालन - स्वामी अविनाश भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340
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| हास्य-ध्यान |
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"हास्य की क्षमता स्वयं की ओर इंगित होनी चाहिए - स्वयं पर हंसना बहुत बड़ी बात है और जो स्वयं पर हंस सकता है वह धीरे-धीरे दूसरों के प्रति करूणा और उत्तरदायित्व से भर जाता है पूरी दुनिया में कोई घटना, कोई विषय हास्य को इस भांति से नहीं लेता है।"
ओशो
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