Osho World Online Hindi Magazine :: June 2012
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गतिविधियां
ओशो वर्ल्ड गैलेरिया: बुद्ध पूर्णिमा सप्ताह

बुद्ध पूर्णिमा सप्ताह के अंतर्गत 26 अप्रैल की संध्या ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में उपस्थित साधकों ने मौन-ध्यान के साथ भगवान बुद्ध पर ओशो के प्रवचनों को सुना। अपने प्रवचनों में ओशो बतातें हैं — ‘‘बुद्ध जैसे कपड़े पहन लो, बुद्ध जैसे चलने लगो, इसमें कोई बड़ी अड़चन तो नहीं है। थोड़ा सा अभ्यास चाहिए, ठीक बुद्ध जैसे बोलने लगो, बुद्ध जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, तुम भी करो, यह सब किया जा सकता है। यही लोग करते रहे सदियों से। तुम अपने दीए खुद न बन सके। तुमने बुद्ध के दीए का एक चित्र बना लिया, चित्र को छाती से लगाकर चलने लगे।

दीए के चित्र से रोशनी नहीं होती, खयाल रखना। अंधेरा जब पड़ेगा तब तड़फोगे, क्योंकि वह दीए का चित्र रोशनी नहीं करेगा।’’

ओशो के अमृत प्रवचनांशों को अनगिनत मित्रों ने मौनपूर्वक सुना।

     

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ओशोधाम: ध्यान और उत्सव की जीवन-शैली

ओशोधाम में 2 से 5 अप्रैल को स्वामी अमित सरस्वती तथा मा प्रेम देवयानी ने मेडिटेट-सेलिब्रेट शिविर का संचालन किया। 06 से 08 अप्रैल एक तीन दिवसीय ध्यान शिविर लगा जिसका संचालन स्वामी चैतन्य कीर्ति ने किया। ध्यान-शिविर में बहुत से नए मित्रों का आगमन हुआ। 9 से 12 अप्रैल को स्वामी अविनाश भारती ने साधकों को ध्यान और उत्सव की जीवन-शैली की अनुभूति का स्वाद दिया।

13 से 19 अप्रैल को ओशोधाम में नो-माइंड ध्यान ग्रुप हुआ, जिसका संचालन स्वामी शिव भारती और मा योग मधु ने किया। इसके बाद मूविंग डीपर इन टू द नॉन — ध्यान शिविर का 20 से 24 अप्रैल को आयोजन हुआ। इसका संचालन स्वामी रविन्द्र भारती ने किया। 25 से 29 अप्रैल को मा योग शुक्ला ने पांच दिवसीय ध्यान शिविर का संचालन किया। शिविर में अनेक नए साधकों ने ओशो की ध्यान विधियों को जाना।

माह के अंत में 30 अप्रैल से 3 मई तक मेडिटेट-सेलिब्रेट का संचालन किया स्वामी ध्यान निशांत ने। और इस प्रकार ओशोधाम में अप्रैल का पूरा महीना ध्यान और उत्सव की जीवन-शैली रहा।

सन्यास जगत

मधेपुरा, बिहार

ओशो मेघदूत ध्यान उपवन में 01 से 21 मार्च इक्कीस दिवसीय सक्रिय ध्यान प्रयोग हुए। साथ-ही 19 से 21 मार्च ओशो संबोधि महोत्सव मनाया गया। उत्सव में ओशो-संन्यासियों के साथ-साथ बच्चे, युवा तथा बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। ध्यान, गीत-संगीत व ओशो-प्रवचनों में गहरे डूबकर सभी ने मौन व आनंद का स्वाद चखा। महोत्सव का संचालन मा प्रेम प्रशंसा तथा स्वामी अंतर आलोक ने किया।

-स्वामी प्रेम अनुतोश

भिलाई, छत्तीसगढ़

ओशो संबोधि दिवस के अवसर पर 21 मार्च को एक दिवसीय महोत्सव का आयोजन हुआ। 50 प्रेमियों ने उत्सव का खूब आनंद लिया। स्वामी धर्म चैतन्य ने शिविर का संचालन किया।

-स्वामी ध्यान विरामो

वाराणसी, उत्तर प्रदेश



ओशो मंदाकिनी आश्रम में 30 मार्च से 01 अप्रैल ओशो ध्यान शिविर आयोजित किया गया। स्वामी आनंद विजय के संचालन में साधक मित्रों ने होशपूर्वक जीने की कला के विभिन्न आयामों का स्वाद लिया। कार्यक्रम में 65 मित्रों की सहभागिता रही। शिविर के अंतिम दिन 9 मित्रों ने नव-संन्यास में प्रवेश किया।

-मा अमृता

कोरबा, छत्तीसगढ़



जेरब हाईस्कूल में 8 अप्रैल को एक दिवसीय ध्यान शिविर लगा। 200 साधकों ने पूरे दिन ओशो ध्यान पद्धतियों का स्वाद चखा। स्वामी आनंद एकांत व मा शशि राधा ने शिविर का संचालन किया।

सोलन, हिमाचल प्रदेश



12 से 15 अप्रैल एक त्रि-दिवसीय साधना शिविर लगा। ध्यान में स्थानीय मित्रों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के प्रेमी भी एकत्रित हुए। मा धर्म ज्योति के सान्निध्य में ‘मिस्टिक रोज़’ व ‘नो-माइंड थेरेपी’ के छोटे-छोटे प्रयोग भी हुए। साथ-ही प्रश्नोत्तर सत्र में सभी मित्रों के प्रश्नों का समाधान हुआ। पूरे कार्यक्रम में 100 साधकों की उपस्थिति रही।

-ओशो सान्जेन

मऊ, उत्तर प्रदेश

तीन दिवसीय, 12 से 15 अप्रैल तक ओशो ध्यानोत्सव का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुआ। उत्सव में अलग-अलग क्षेत्रों के 25 साधकों का आगमन हुआ। स्वामी सुधाकर भारती के संचालन में, ओशो ध्यान विधियों के साथ तीन दिन तक पूरा वातावरण उत्सवपूर्ण बना रहा।

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

 

कासिमपुर पावर हाउस के हर्ष उद्यान में 13 अप्रैल को ओशो ध्यान शिविर लगा। एक दिवसीय प्रोग्राम में उपस्थित प्रेमियों ने कई दैनिक ध्यान-विधियों को जाना। स्वामी भरत भारती ने ध्यान-शिविर का संचालन किया।

देहरादून, उत्तराखंड



ओशो ओम बोधिसत्व कम्यून में 13 से 15 अप्रैल तक तीन दिवसीय शिविर संपन्न हुआ। जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों से आए साधकों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से ‘मौन’ एवं महामुद्रा’ ध्यान द्वारा साधकों ने ध्यान की गइराई को जाना। ओशो की प्रगाढ़ ऊर्जा की उपस्थिति में संन्यास-दीक्षा उत्सव के साथ शिविर संपन्न हुआ।

मालवीय नगर, नई दिल्ली

ओशो भगवानश्री मेडिटेशन सेंटर पर दिनांक 14 अप्रैल को एक दिवसीय ध्यान शिविर लगा। शिविर में ओशो की विभिन्न ध्यान विधियों के प्रयोग हुए। ध्यान-शिविर का संचालन स्वामी रविन्द्र भारती ने किया।
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर 6 मई को साधक मित्रों ने श्रद्धा और उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया। स्वामी आमीन ने इस कार्यक्रम का संचालन किया।

ओशो निसर्ग, धर्मशाला

‘‘द डांस ऑफ सेवेन वेल्स--बैली डांस’’ का एक कार्यक्रम हुआ 14 से 18 अप्रैल को। ग्रीस की मा प्रभु इरसमिया ने प्रोग्राम का संचालन किया। रजनीशपुरम से आने के पश्चात, पहली बार मा इरसमिया ने साधकों के लिए पुणे के बुद्ध-हॉल में इस कार्यक्रम की प्रस्तुति की थी। वर्ष 1988, ओशो की उपस्थिति में फिल्म के माध्यम से यह प्रोग्राम हुआ था। ओशो निसर्ग में यह कार्यक्रम अविस्मरणीय रहा जिसका अनगिनत मित्रों ने ध्यान के साथ आनंद लिया।

देवताल, जबलपुर

ओशो अमृतधाम में दिनांक 14 से 22 अप्रैल नो-माइंड ग्रुप का आयोजन हुआ। भारत के विभिन्न प्रांतों से आए साधक मित्रों ने इसमें भाग लिया। इस ध्यान ग्रुप के माध्यम से सभी ने एक नये रूपांतरण का अनुभव किया।

-स्वामी शिखर

सोलन, हिमाचल प्रदेश



मा धर्म ज्योति के सान्निध्य में, 18 अप्रैल की संध्या ओशो आशीष ध्यान केंद्र में सांध्य-सत्संग का महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुआ। कीर्तन-ध्यान में अनेकों प्रेमियों की मौजदूगी रही।

-अजीत वर्मा

माउन्ट आबू, राजस्थान

 

ओशो लाफ़िंग ध्यान केंद्र द्वारा 19 से 22 अप्रैल ओशो ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। तीन-दिवसीय शिविर में 20 साधकों का आगमन हुआ। नव-संन्यास उत्सव में 8 मित्रों ने दीक्षा ली। शिविर का संचालन स्वामी अंतर जश्न ने किया।

-स्वामी ध्यान साहस

रानीगंज, पश्चिम बंगाल

ओशो मेडिटेशन एनर्जी फील्ड द्वारा एक त्रि-दिवसीय शिविर आयोजित किया गया। 20 से 22 अप्रैल तक चले ध्यान में कुछ प्रमुख विधियां करवाई गई। स्वामी अक्षय विवेक ने शिविर का संचालन किया।

-स्वामी दयाल

सिवान, बिहार

ओशो दिव्य ध्यान केंद्र के आयोजन में 20 से 22 मई तीन-दिवसीय शिविर लगा। ध्यान में 90 प्रेमियों का आगमन हुआ। सभी ने दैनिक ध्यान प्रयोगों को किया तथा ओशो-प्रवचनों को मौनपूर्वक सुना। अंतिम दिन 13 मित्र नव-संन्यास में दीक्षित हुए। मा प्रेम ईशा ने शिविर का संचालन किया।

-मा आनंद साक्षी

डालूवाला, हरिद्वार

ओशो प्रेम नीड़ आश्रम के प्राकृतिक वातावरण में 26 से 29 अप्रैल ओशो ध्यान शिविर लगा। शिविर में विभिन्न राज्यों के प्रेमियों का आगमन हुआ। संन्यास-उत्सव में तीन मित्रों ने दीक्षा ग्रहण की। मा प्रेम भारती ने ध्यान-शिविर का संचालन किया।

-मा प्रेमी मीरा

नारगोल, गुजरात

27 से 29 अप्रैल एन.पी.ए. गेस्ट हाउस में तीन दिवसीय ध्यान शिविर लगा। कार्यक्रम में 120 साधक-मित्रों का आगमन हुआ। शिविर का संचालन स्वामी समर्पण भारती ने किया।

-स्वामी अंतर राही

भुज, कच्छ

ओशो संकल्प ध्यान केंद्र के प्राकृतिक वातावरण में दो-दिवसीय साधना शिविर संपन्न हुआ। 23 शिविरार्थियों ने ध्यान में हिस्सा लिया। साधना-शिविर का संचालन स्वामी चैतन्य शिखर ने किया।

-स्वामी धर्म अद्वय

समस्तीपुर, बिहार

एक तीन दिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन हुआ ओशो ध्यान केंद्र, पटोरी में। कार्यक्रम में 80 मित्रों ने विभिन्न ध्यान प्रयोगों का आनंद लिया। मा प्रेम ईशा के संचालन में 9 साधकों ने नव-संन्यास को स्वीकार किया।

-मा ध्यान प्रज्ञा

पंजाब

ओशो सर्किल फाउंडेशन के तत्वावधान में पंजाब के 9 शहरों में डेढ़ माह तक ओशो पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया, जिसमें ओशो की हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी पुस्तकों के अतिरिक्त मासिक पत्रिकाएं व ध्यान-संगीत आदि भी उपलब्ध थे। विभिन्न क्षेत्रों के ओशो-संन्यासियों व मित्रों का बहुत सहयोग रहा। साथ-ही मीडिया ने भी इस कार्यक्रम में खूब उत्साह दिखाया।

-स्वामी वेदांत प्रेम

बोधगया, बिहार



बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव पर 6 से 7 मई को एक दो दिवसीय ओशो ध्यान-साधना शिविर लगा। कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों के साधकों का आगमन हुआ। संचालन स्वामी हरिश्चंद्र भारती ने किया।

भुज, गुजरात

फ्रेंड्स ऑफ ओशो--कच्छ की ओर से बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। पूरे दिन विविध ध्यान प्रयोग एवं नृत्य-कीर्तन का कार्यक्रम चलता रहा। साथ-ही भगवान बुद्ध पर ओशो के प्रवचनों को सभी ने मौनपूर्वक सुना। महोत्सव का संचालन स्वामी आनंद योगेश ने किया।

-स्वामी सत्य दर्शन

जयपुर, राजस्थान

ओम शांति ओशो लाईब्रेरी द्वारा 4 मई को राजस्थान विधानसभा की लाईब्रेरी के लिए ओशो-साहित्य उपहार स्वरूप दी गई। स्वामी सत्य वेदांत तथा स्वामी आनंद तथागत द्वारा विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में ओशो-प्रवचनों की 246 हिंदी व अंग्रेज़ी पुस्तकों का सेट लाईब्रेरी को दिया गया। साथ-ही स्वामी सत्य वेदांत द्वारा रचित ‘‘ओशो: ध्यान और उत्सव के ओजस्वी ऋषि’’ पुस्तक का लोकार्पण भी हुआ। प्रोग्राम में अध्यक्ष महोदय तथा स्वामी सत्य वेदांत ने ओशो-दर्शन पर अपने विचार व्यक्त किए।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश



बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 06 मई को ओशो वर्ल्ड लखनऊ ने एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया। उत्सव में विभिन्न ध्यान-विधियां करवाई गई। महोत्सव का संचालन स्वामी निसंग तीर्थ तथा स्वामी मज़हर खान ने किया।

-मज़हर खान

काठमाण्डू, नेपाल



ओशो तपोवन में सात-दिवसीय 22 से 28 अप्रैल नो-माइंड ध्यान ग्रुप का आयोजन हुआ। माइंड से नो-माइंड की इस यात्रा में 25 प्रेमियों ने हिस्सा लिया। प्रकृति के सघन वातावरण में रेचन बहुत ही सहज हुआ। लोग मौन में गहरे डूबे। नव-संन्यास में 12 मित्रों ने दीक्षा ग्रहण की। संचालन स्वामी आनंद अरुण ने किया।

रूस

6 से 8 अप्रैल साइबेरिया की विश्वप्रख्यात झील वैकाल के किनारे ओशो ध्यान शिविर का आयोजन हुआ। 13 से 15 अप्रैल मॉस्को के योगा फेडरेशन हॉल, डिनामो में तीन दिवसीय शिविर लगा। इस ध्यान-शिविर में विज्ञान भैरव तंत्र की विधियों के गहन प्रयोग हुए। 16 अप्रैल को सेंट पीट्सबर्ग में एक दिवसीय ध्यान शिविर संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम में 27 मित्रों ने नव-संन्यास दीक्षा ली। रूस में ध्यान-शिविरों का संचालन स्वामी आनंद अर्हत ने किया।

अमेरिका व कनाडा



6 से 8 अप्रैल वेनकुवर के लायोन वे विलेज में तीन दिन का शिविर लगा। शिविर में 12 मित्रों ने नव-संन्यास ग्रहण किया।
क्वान्टलेन पोलिटेक्निक युनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में ध्यान व ओशो के दर्शन पर एक विचार गोष्ठी का कार्यक्रम हुआ। प्रोग्राम में स्वामी आनंद अरुण ने ओशो की देशना पर परिचर्चा की।
13 से 15 अप्रैल डलास के ओशो ज़ोरब स्टूडियो में तीन दिवसीय ध्यान शिविर आयोजित किया गया। ध्यान-साधना में 5 मित्रों ने नव-संन्यास में प्रवेश किया। स्वामी आनंद अरुण ने ध्यान-शिविरों का संचालन किया।

गुड़गांव, हरियाणा: ओशो फिल्म शो

दिनांक 6 मई की संध्या गुड़गांव स्थित सेक्टर 29 के हुडा ज़िमखाना क्लब में एक तीन घंटे की फिल्मोत्सव का महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुआ। महोत्सव संध्या 4 बजे से शुरू हुआ और 6 बजे तक चला। उत्सव का शुभारंभ ओशो ओम-ध्यान के साथ हुआ। प्रोग्राम में ओशो ध्यान विधियों के कार्यक्रम भी हुए जिसका संचालन मा धर्म ज्योति ने किया। ध्यानोत्सव का आयोजन स्वामी अमृत उल्लास द्वारा किया गया जिसमें अनगिनत मित्रों ने हिस्सा लिया।