Osho World Online Hindi Magazine :: June 2012
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हास्य-ध्यान

"हास्य की क्षमता स्वयं की ओर इंगित होनी चाहिए - स्वयं पर हंसना बहुत बड़ी बात है और जो स्वयं पर हंस सकता है वह धीरे-धीरे दूसरों के प्रति करूणा और उत्तरदायित्व से भर जाता है पूरी दुनिया में कोई घटना, कोई विषय हास्य को इस भांति से नहीं लेता है।"

ओशो

  • एक जगह एक मनुष्य गुप्त रूप से शराब बेचा करता था। एक दिन उसने अपने नौकर से कहा--जरा देख कर तो आ आज सड़क पर कोई पुलिसमैन तो नहीं है।’’ लगभग दो घंटे बाद जब वह आदमी कुछ आदमियों को शराब दे रहा था, तब वह नौकर दरोगा के साथ वहां पहुंचा और बोला — ‘‘मालिक, मैं ढूढ़ते-ढूढ़ते थक गया, जब कहीं पुलिसमैन नहीं मिला, तब बहुत कह-सुनकर दरोगा साहब को ले आया।’’

  • एक प्रेमी झिझकता हुआ अपनी प्रेमिका के बाप के पास पहुंचा और बोला — मैं आपकी लड़की का हाथ मांगने आया हूं।’’
    ‘‘सिर्फ हाथ नहीं मिलेगा।’’ उत्तर मिला — मांगनी है तो पूरी लड़की मांगो।’’

  • एक विवाहित धनी व्यापारी, जो लड़कियों से प्रेम करने में बड़े माहिर थे, अपने नए नौकर को समझाते हुए बोले — ‘‘देखो, मैं आज किसी भी लड़की से मिलना नहीं चाहता, यदि कोई लड़की आकर मेरे बारे में पूछे और कहे कि मुझे जरूरी काम है तो तुम कह देना कि ऐसा तो सभी कहते हैं।’’
    थोड़ी देर बाद एक सुन्दर लड़की उन महाशय से मिलने आयी। नौकर ने उसे व्यापारी महाशय से मिलने से रोका तो वह झल्लाकर बोली — ‘‘तुम्हें मालूम नहीं, मैं उनकी पत्नी हूं।’’
    ‘‘पत्नी, ऐसा तो सभी लड़किया कहती हैं।’’ नौकर का उत्तर था।

  • शादी हुए नौ साल बीत गए, परंतु पति-पत्नी में ने तो कभी मनमुटाव हुआ, न कभी झगड़ा, किंतु एक दिन भोजन के समय पति ने अपनी पत्नी के स्वभाव में विचित्र परिवर्तन पाया।
    पति ने बड़ी शांति से पूछा — ‘‘आखिर क्या बात है?’’
    पहले तो पत्नी ने बताना स्वीकार नहीं किया, किंतु कई बार पूछने पर आंखों में आंसू भरकर कहा — ‘‘अगर फिर कभी सपने में मैंने तुम्हें किसी पराई स्त्री को, ‘किस’ करते देखा तो मैं जिंदगी-भर तुमसे बात नहीं करूंगी।’’

  • रेलवे का एक रूट था, जिस पर गाड़ी बहुत ही सुस्त रफ्तार से चलती थी और चलते-चलते कहीं भी रुक जाती थी तो चलने का नाम ही नहीं लेती थी।
    एक बार ऐसी ही एक गाड़ी एक उजाड़ स्थान पर रुकी कि फिर चलने का नाम नहीं ले रहीं थी। परेशान हाल मुसाफिर खिड़कियों से बाहर झांक रहे थे। एक खिड़की के पास से गार्ड गुजरा तो एक मुसाफिर बोला — ‘‘गार्ड साहब, अगर इजाजत हो तो मैं गाड़ी से उतरकर एक फूल तोड़ लाऊं।’’
    ‘‘लेकिन यहां फूल कहां हैं?’’ गार्ड दूर तक दृष्टि दौड़ाते हुआ बोला।
    ‘‘अभी नहीं हैं, लेकिन हो जाएंगे।’’ मुसाफिर इत्मीनान से बोला — ‘‘मेरे पास बीज हैं।’’

  • पत्नी — आज आफिस में एक अजीब पार्टी का आयोजन किया गया है। प्रत्येक आमंत्रित व्यक्ति से कहा गया है कि अपने साथ एक बेकार चीज जरूर लाना।’’
    पति — ‘‘हमारे पास तो कोई ऐसी फालतू चीज नहीं है, फिर तुम क्या ले जाओगी?
    पत्नी — ‘‘कुछ नहीं है तो क्या, तुम तो साथ चल रहे हो?