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यह पुस्तक ‘महावीर-वाणी’ पर ओशो द्वारा दिए गए कुल 54 प्रवचनों में से 28 से 40 प्रवचनों का संकलन है। पुस्तक के प्रकाशक हैं डायमंड बुक्स।
इस पुस्तक की भूमिका स्वामी चैतन्य कीर्ति ने लिखी है: ‘‘महावीर-वाणी के सूत्रों पर ओशो के प्रवचनों का यह तीसरा संकलन है: संकल्प साधना।
यह संकल्प साधना क्या है?
इसका मूल बिंदु है: होश।
साधारणतः हम यांत्रिक ढंग से जीते हैं, सोए-सोए जीते हैं, मूर्च्छा में जीते हैं। और हमारा जीवन एक दुर्घटना मात्र बन कर रह जाता है। इसीलिए तो हमारे जीवन में इतना विषाद है, इतना संताप है। इस संताप और विषाद को मिटाने के भी हम जो उपाय करते हैं वे हमें और अधिक विषाद में ले जाते हैं, क्योंकि वे आत्मविस्मृत के उपाय हैं। कोई शराब पीने लगता है, कोई धन-संपत्ति की तरफ दौड़ने लगता है, कोई राजनीति की पागल दौड़ में संलग्न हो जाता है, कोई किसी और पद के नशे में उन्मत्त होने लगता है। लेकिन कोई भी असली उपाय नहीं करता कि जिससे यह विषाद मिटे और जीवन में आनंद का प्रादुर्भाव हो।
वही असली उपाय हमें महावीर-वाणी के माध्यम से ओशो बताते हैं: ‘महावीर ने सीधी-सी बात कही है, चलो तो होशपूर्वक, बैठो तो होशपूर्वक, उठो तो होशपूर्वक, भोजन करो तो होशपूर्वक। जो भी तुम कर रहे हो जीवन की क्षुद्रतम क्रिया, उसको भी होशपूर्वक किये चले जाओ। क्रिया में बाधा न पड़ेगी, क्रिया में कुशलता बढ़ेगी और होश भी साथ-साथ विकसित होता चला जाएगा। एक दिन तुम पाओगे सारा जीवन होश का एक दीप-स्तंभ बन गया, तुम्हारे भीतर सब होशपूर्वक हो गया है।’
यह होश आत्मस्मरण का ही दूसरा नाम है। जहां-जहां हम अपने को मूर्च्छा में पाएं, हम यांत्रिक हो जाएं, वहां संकल्प-पूर्वक हम अपने स्मरण को ले आएं, होश को ले आएं, तो हमारे जीवन में ध्यान के, अहिंसा के, प्रेम के, आनंद के द्वार खुलने लगते हैं। उन्हीं द्वारों के माध्यम से ओशो हमें अमृत लोक में ले चलते हैं। ये प्रवचन एक आमंत्रण हैं जागरण की साधना के लिए।’’
यह पुस्तक पेपर बैक संस्करण में उपलब्ध है जिसे आप ओशो वर्ल्ड गैलेरिया से खरीद सकते हैं।
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