Osho World Online Hindi Magazine :: March 2012
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हास्य-ध्यान

"तुम्हें गंभीर संत बनने की जरूरत नहीं है। तुम्हें एक हंसता मुस्कराता हुआ कलाकार बनना है, हंसता हुआ संगीतज्ञ बनना है अथवा बनना है--प्रमुदित नाचता हुआ एक नतर्क।"

-ओशो
भविष्य की आधारशिलाएं

  • एक साहब अपने दोस्तों के बीच बैठे हुए अपने साले की लड़की की बड़ी बड़ाई कर रहे थे। कह रहे थे: लड़की का कद भी बहुत ऊंचा है। उसकी नाक भी बहुत ऊंची है। उसने शिक्षा भी बहुत ऊंची प्राप्त कर रखी है। उनके परिवार का स्टैंडर्ड ही बहुत ऊंचा है। और तो और...इतने में ही एक आदमी ने कहा कि हां, वह सुनती भी बहुत ऊंचा है।

  • एक बार सड़क पर कालेज की दो लड़कियां जा रही थीं। अचानक किसी बात पर उनकी तू-तू मैं-मैं हो गई। पहली ने कहा, तुझे अंधा पति मिलेगा। दूसरी ने उत्तर दिया, तुझे लंगड़ा पति मिलेगा। यह बात पास से गुजरते हुए दो भिखारियों ने भी सुनी, जिनमें से एक अंधा था और दूसरा लंगड़ा। वे यह वार्तालाप सुन कर ठहर गए। जब काफी देर तक मामला नहीं सुलझा, तो दोनों भिखारी भीड़ को चीरते हुए उन लड़कियों के पास पहुंचे और बोले, देवियों आप बाद में चाहे जितनी देर लड़ती रहें, लेकिन हमें यह बता दें कि हम खड़े रहें या जाएं?

  • एक नेताजी व्याख्यान दे रहे थे, बड़े जोश-खरोश में थे। सो बिना आगे देखे बोलते गए और जोश में थे सो चलते भी गए। कह रहे थे: तुम अमर बढ़े चलो! तुम अजर बढ़े चलो! आन पर चढ़े चलो! और गड़ाप से मंच के नीचे चले गए।
    मुल्ला नसरुद्दीन भीड़ में था, खड़ा हो गया और कहा, खड्ड में गिरे चलो!

  • मुल्ला नसरुद्दीन रास्ते से गुजर रहा था। पत्नी के साथ था। एकदम झपट्टा मार कर आगे बढ़ा, कुछ उठाया झुक कर सड़क से, फिर क्रोध से बड़ी वजनी गाली दी और जो उठाया था उसे फेंका। और कहा कि अगर यह आदमी मुझे मिल जाए तो इसकी गर्दन काट दूं।
    पत्नी ने कहा, मामला क्या है? किसकी गर्दन काट रहे हो? क्या उठाया, क्या फेंका?
    उसने कहा कि कोई दुष्ट इस तरह से खंखारता है कि अठन्नी मालूम पड़ती है।


  • एक फेरीवाला एक स्त्री को कुछ सामान बेच रहा है। बोला, बीबी जी, क्या आपको बिजली की इस्त्री लेनी है?
    गृहस्वामिनी: नहीं, पड़ोसियों को दे दो। क्योंकि उनकी पुरानी इस्त्रियां खराब हो गई हैं, हम तो उन्हीं से मांग कर काम चला लेते हैं।
    फेरीवाला: मगर बीबी जी, मैंने तो आपके पतिदेव को यह कहते सुना था कि उनकी पुरानी इस्त्री बहुत ही खराब है और वे अब एक नई इस्त्री चाहते हैं।
    गृहस्वामिनी: अच्छा, तो वह अब घर के बाहर भी मेरी बुराई करने लगा।

  • एक यात्री ने अपनी कार पहाड़ के एक ढलान पर रोकी, बहुत घबड़ा कर रोकी। पास में ही बैठे एक देहाती से कहा कि भई, यह तो बहुत खतरनाक ढलान है, यहां सावधानी का बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया है? यहां से तो कोई गिरे तो सीधा पाताल जाए। नीचे इतना बड़ा गड्ढा है कि बचना असंभव है। यहां सावधानी का बोर्ड तो होना ही चाहिए।
    उस ग्रामीण ने कहा कि जी हां, यह खतरनाक तो जरूर है और यहां सावधान रहने का बोर्ड भी लगाया गया था, लेकिन जब दो साल तक कोई दुर्घटना नहीं हुई तो उसे अनावश्यक समझ कर अलग कर दिया गया है।

  • चंदूलाल की पत्नी फोन पर लंबी बातें करने की आदत से परेशान थी। कम से कम एक घंटा तो लग ही जाता। ज्यादा भला लग जाए, कम तो नहीं। एक दिन संयोग से पंद्रह मिनट में ही फुरसत पा गई, तो चंदूलाल ने पूछा, आज तो बड़ी जल्दी बात खतम कर दी, क्या तबियत ठीक नहीं है?
    श्रीमती जी ने इत्मीनान से जवाब दिया, अजी रांग नंबर लग गया था।
    चंदूलाल ने कहा, रांग नंबर फिर भी पंद्रह मिनट बात चली!