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प्रस्तुत पुस्तकें लखनऊ के दिव्यांश पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित की हैं। हिंदी पाठकों के लिए ये पुस्तकें नयी हैं क्योंकि ये ओशो की अंग्रेज़ी पुस्तकों का अनुवाद हैं।
इन पुस्तकों के अनुवादक हैं: स्वामी ज्ञान भेद।
एक फक्कड़ मसीहा, ओशो के जीवन वृत को नौ खंडों में लिखने के बाद भी स्वामी ज्ञान भेद निरंतर ओशो की अंग्रेज़ी भाषा की पुस्तकों के हिंदी अनुवाद में संलग्न हैं। उनका यह कार्य अत्यंत सराहनीय है।
प्रेम योग तथा आनंद योग बाउल फकीरों पर ओशो-प्रवचनों, दि बिलविड, पहले और दूसरे खंड का हिंदी अनुवाद है।
पहले खंड की भूमिका में ओशो कहते हैं: ‘‘बाउलों को बावरा कहा जाता है, क्योंकि वे लोग पागल जैसे होते हैं। बाउल शब्द संस्कृत के मूल शब्द ‘वातुल’ से आता है जिसका अर्थ है-पागल। बाउल लोगों का कोई धर्म नहीं होता। न वे हिंदू होते हैं न मुसलमान, न ईसाई और न बौद्ध ही, वे केवल साधारण मनुष्य होते हैं। वे समग्र रूपेण विद्रोही होते हैं। वे किसी के होकर नहीं रहते। वे केवल स्वयं के ही होकर स्वयं के छंद से जीते हैं।’’
आनंद योग पुस्तक का प्रथम प्रवचन इस गीत से शुरू होता है:
‘‘उत्सव आनंद में डूबे साहसी दीवानों का
रस और माधुर्य जब एक स्वर्णपात्र में इकट्ठा हो जाता है
तभी उसका मूल्य समझ में आता है कि
वह श्रेष्ठतम है। पूजा-प्रार्थना फलप्रद होकर, तभी
विकसित करती है जब तुम्हारा पात्र तैयार और शुद्ध हो।
वही प्रेम सत्य को उपलब्ध होता है जो समग्रता से प्रेम करता है।
इसे बार-बार प्रयास कर असफल होने वाला व्यक्ति ही
पूरी तरह समझता है। जब उसके आगे मृत्यु के रहस्य खुलते हैं
वह पूरी तरह जीवंत होता है।
जीवन के दूसरे तलों में ऐसा है ही क्या
जिसकी वह फिक्र करे...?’’
हिंदी पाठकों के लिए दोनों खंड ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, अंसल प्लाज़ा, नई दिल्ली में बिक्री के लिए उपलब्ध है। |