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| ओशो दर्शन |
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| अपने दीए आप बनो |
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गुरु तुम्हारी बैसाखी नहीं बनने वाला है। जो बैसाखी बन जाए तुम्हारी, वह तुम्हारा दुश्मन है, गुरु नहीं है। क्योंकि जो बैसाखी...
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| श्रवण सरल नहीं, बड़ी कला है |
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श्रवण सरल नहीं। श्रवण बड़ी कला है। आते-आते ही आती है। राग, द्वेष, मोह और तृष्णा के कारण धर्म-श्रवण नहीं हो पाता। पूर्वाग्रहों के कारण...
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| संतों की वाणी |
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असंतों की वाणी से सुगंध तो मिलनी कठिन है, दुर्गंध ही मिलेगी। संतों की वाणी से संतोष मिलेगा, क्योंकि संतोष सत्य की...
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| हम अनंत के यात्री हैं |
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जितने लोगों को लाभ हो सकता था, उन्होंने लाभ ले लिया; जो अभागे हैं, उनके लिए बैठे रहने से कुछ लाभ नहीं...
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| राजनीति, राजनेता और देश |
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प्रश्न: ओशो, इस देश के राजनेता देश को कहां लिए जा रहे हैं? समाजवाद का क्या हुआ?
भोलेराम! भोले ही रहे। राजनेताओं से, और...
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| जो जागा, वही बुद्ध |
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बुद्ध जागरण की अवस्था का नाम है। गौतम बुद्ध एक नाम है। ऐसे और अनेंकों नाम हैं
धम्मपद के अंतिम सूत्रों का दिन आ गया...
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| ओशो अमृत-पत्र |
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प्रभु को जानना है, तो स्वयं को जीतो
मनुष्य का मन दासता में है। हम अपने ही दास पैदा होते हैं। वासना की जंजीरों के साथ ही जगत में हमारा आना होता है। बहुत सूक्ष्म बंधन हमें बांधे हैं।
परतंत्रता जन्मजात है। वह प्रकृति प्रदत्त है। हमें उसे कमाना नहीं होता। मनुष्य पाता है कि वह परतंत्र है। पर, स्वतंत्रता अर्जित करनी होती है। उसे वही उपलब्ध होता है, जो उसके लिए श्रम और संघर्ष करता है। स्वतंत्रता के लिये मूल्य देना होता है...
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| ध्यान-विधि |
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ओशो सक्रिय ध्यान
सभी ओशो सक्रिय ध्यान विधियों की शुरुआत किसी क्रिया से होती है जो प्रायः सघन व शारीरिक होती है, जिसके पश्चात कुछ समय का मौन होता है। सभी विधियां संगीत के साथ की जाती हैं... |
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| ओशो कथा-सागर |
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आनंद कहां है?
जो बाहर है वह आनंद नहीं है, और जो भीतर है उसे खोजने कहां जाऊं? मैंने तो सब खोज छोड़ कर ही उसे पा लिया है।
मैं एक कथा कहता हूं। उस कथा में ही आपका उत्तर है... |
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| जीवन का रूपांतरण - मा प्रेम वंदना |
अभी और यहां जीना - प्रत्येक क्षण
मोहिनी मदान, एक सुखी गृहस्थिन हैं। नोएडा में पति एवं बच्चों से भरापूरा परिवार है उनका। यूं तो वह कामकाजी महिला नहीं हैं, लेकिन पति के कार्यों में हाथ बटाती हैं। ओशो के संपर्क में आपका कैसे आना हुआ? इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया... |
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| ओशो का ओशनिक साहित्य |
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प्रेम-योग और आनंद-योग
प्रस्तुत पुस्तकें लखनऊ के दिव्यांश पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित की हैं। हिंदी पाठकों के लिए ये पुस्तकें नयी हैं क्योंकि ये ओशो की अंग्रेज़ी पुस्तकों का अनुवाद हैं।
इन पुस्तकों के अनुवादक हैं: स्वामी ज्ञान भेद।
एक फक्कड़ मसीहा, ओशो के जीवन वृत को नौ खंडों में लिखने के बाद भी स्वामी ज्ञान भेद निरंतर ओशो की अंग्रेज़ी भाषा की पुस्तकों के हिंदी अनुवाद में संलग्न हैं। उनका यह कार्य अत्यंत सराहनीय है...
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| रहस्यदर्शियों पर ओशो |
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भगवान बुद्ध
बुद्ध कहते हैं, तुम सिर्फ मेरा निमंत्रण स्वीकार करो। इस भवन में दीया जला है, तुम भीतर आओ। और यह भवन तुम्हारा ही है, यह तुम्हारी ही अंतरात्मा का भवन है।
गौतम बुद्ध के संबंध में सात बातें।
पहली, गौतम बुद्ध दार्शनिक नहीं, द्रष्टा हैं... |
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| स्वास्थ्य |
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आदमी होने की बीमारी
बीमारियों का इलाज चिकित्सक के पास है, लेकिन वह जो आदमी होने की बीमारी है, उस बीमारी का इलाज ध्यान के पास है।
मेडिसिन आदमी को ऊपर से शरीर की व्यवस्था और बीमारी से मुक्त करने की चेष्टा है। लेकिन ध्यान रहे, आदमी सब बीमारियों से मुक्त होकर भी आदमी... |
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| ओशोधाम-आगामी ध्यान शिविर |
बोर्न अगेन ग्रुप
11 से 17 मई, 2012 तक
संचालन - स्वामी रविन्द्र भारती
स्थान - ओशोधाम, नई दिल्ली
फोन - 011-25319026, 25319027
मोबाइल - 09717490340
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| आगामी कार्यक्रम-ओशो फिल्मोत्सव |
| गुड़गांव, हरियाणा
6 मई, सांय 4 से 7 बजे
स्थल: हुडा ज़िमखाना क्लब, सेक्टर-29
सम्पर्क: स्वामी अमृत उल्हास, 09050008988
नोएडा, उत्तर प्रदेश
27 मई, सांय 4 से 7 बजे
स्थल: कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर-44, बोटनिकल मेट्रो स्टेशन के पास
सम्पर्क: 09910726372 |
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| हास्य-ध्यान |
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‘‘जब तुम वास्तव में हंसते हो तो अचानक मन विलीन हो जाता है। जहां तब मैं जानता हूं, नाचना और हंसना सर्वोत्तम, स्वाभाविक व सुगम द्वार हैं। यदि सच में ही तुम नाचो, तो सोच-विचार रुक जाता है। तुम नाचते हो, घूमते जाते हो, और एक भंवर बन जाते हो--सब सीमाएं, सब विभाजन समाप्त हो जाते हैं’’
-ओशो |
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