Osho World Online Hindi Magazine :: September 2012
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ओशो-साहित्य परिचय
अभी, यहीं, यह

यह नई पुस्तक सूफ़ी बोध-कथाओं पर ओशो प्रवचनों का सुंदर संकलन है। जिसकी झलकियां दिव्यता की ओर ले जाती है

यात्रा की तैयारी और सर्वोच्च शिखर तक पहुंचने के बीच की यात्रा बहुत लंबी है...महान सूफ़ी संतो के बताए मार्गों को बड़ी ही शालीनता से अपने प्रवचनों में सदगुरु ओशो ने समेटा है, 'अभी, यही, यह' पुस्तक की प्रवचन माला में। जिसमें ओशो कहते हैः उस यात्रा की लंबाई आप पर निर्भर करती है। यह लंबाई और लंबी हो सकती है और छोटी भी।

पुस्तक का प्रथम प्रवचन 'सात घाटियां' नामक शीर्षक से प्रारंभ होता है। जिसमें कहा है ''मनुष्य एक विरोधाभास है। मनुष्य ही केवल एक ऐसा प्राणी है, केवल ऐसा जीवित अस्तित्व, जो विरोधाभासी है-और यही मनुष्य का अनूठापन है।'' विश्व के महान गुरु और तत्वज्ञानी ओशो के ये अनमोल प्रवचन पुस्तक में आभूषणों का कार्य करते है। पुस्तक का हृदय कहा जाने वाला तीसरा प्रवचन 'अभी, यहीं, यह' अपने आप में अनूठा है। जोकि सूफ़ी सदगुरु इमाम मुहम्मद बाकिर से संबंधित है। जिसमें वे एक चीटीं से सम्पर्क करने पर पूछते है-तुम्हारा परमात्मा किस आकृति का है? क्या वह चीटीं से मिलता-जुलता है? उसने उत्तर दिया परमात्मा।? नहीं, वास्तव में हम लोगों के पास एक डंक होता है, लेकिन परमात्मा, उसके पास दो डंक होते हैं।'' अर्थात् परमात्मा क्या है? यह तुम्हीं पर निर्भर करता है।

अध्यात्म गुरु ओशो ने सूफ़ी धर्म के बारे में भी बताया कि यह धर्म एक रसायन है। यह शीशे को स्वर्ण में रूपांतरित करने, निम्नतम तल से उच्च तल की ओर ले जाने तथा परिधि से केंद्र पर ले जाने का विज्ञान है। यह संसार को परमात्मा में बदलने का विज्ञान है।

प्रस्तुत ओशो पुस्तक में कुल 8 प्रवचन माला और ओशो जीवन परिचय 276 पृष्ठों में समाया हुआ है। जिसका हिन्दी अनुवाद स्वामी ज्ञानभेद ने किया है। हिन्द पॉकेट बुक्स के प्रकाशन समूह ने इस किताब को प्रकाशित किया है। जिसका मूल्य 175 रू. मात्र है।

यह पुस्तक नई दिल्ली स्थित ओशो वर्ल्ड गैलेरिया, ओशोधाम, ओशो राजयोग ध्यान केंद्र के अतिरिक्त हमारी बेवसाइट www.oshoworld.com पर उपलब्ध है।